थाईलैंड-कंबोडिया सीमा पर भीषण सैन्य झड़प, 15 की मौत, 46 घायल, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने आपातकालीन बैठक बुलाई
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा पर चल रही ताजा सैन्य झड़पों ने दोनों देशों को युद्ध के कगार पर ला खड़ा किया है। थाईलैंड के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि गुरुवार, 24 जुलाई को शुरू हुई इन झड़पों में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 14 आम नागरिक और एक सैनिक शामिल हैं। इसके अलावा, 46 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से कई की हालत गंभीर है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!इस हिंसा का केंद्र 11वीं सदी का प्रीह विहार मंदिर है, जो थाईलैंड के सिसाकेत प्रांत और कंबोडिया के प्रीह विहार प्रांत की सीमा पर स्थित है। 1962 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने इस मंदिर को कंबोडिया का हिस्सा माना था, लेकिन आसपास की 4.6 वर्ग किलोमीटर भूमि को लेकर विवाद अब भी कायम है। 2008 में कंबोडिया द्वारा मंदिर को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में पंजीकृत करने की कोशिश ने तनाव को और बढ़ाया था, जिसके बाद 2008-2011 के बीच कई झड़पें हुई थीं।
थाईलैंड के आंतरिक मंत्रालय के अनुसार, चार सीमावर्ती प्रांतों से 1,00,000 से अधिक लोगों को 300 अस्थायी आश्रयों में स्थानांतरित किया गया है। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर पहले हमला करने का आरोप लगाया है। थाईलैंड ने कंबोडियाई राजदूत को निष्कासित कर दिया और अपने राजदूत को वापस बुला लिया, जबकि कंबोडिया ने भी बैंकॉक में अपने दूतावास को खाली कर दिया।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इस संकट पर शुक्रवार को आपातकालीन बैठक बुलाई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों देशों से शांति बनाए रखने और कूटनीतिक समाधान की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों में राजनीतिक अस्थिरता और कमजोर नेतृत्व इस संघर्ष को और भड़का सकता है। थाईलैंड की गठबंधन सरकार और कंबोडिया में पूर्व तानाशाह हुन सेन के प्रभाव ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
ग्लोबल फायरपावर 2025 के अनुसार, थाईलैंड की सेना (3.6 लाख सैनिक, 5.9 बिलियन डॉलर का रक्षा बजट, और एफ-16 जेट्स) कंबोडिया (1.7 लाख सैनिक, 720 मिलियन डॉलर का बजट, और कोई आधुनिक जेट्स) से कहीं अधिक शक्तिशाली है। हालांकि, कंबोडिया के रॉकेट लॉन्चर सीमित क्षेत्रों में प्रभावी साबित हुए हैं।
आसियान देशों की भूमिका अब इस विवाद को सुलझाने में महत्वपूर्ण होगी। यदि कूटनीतिक प्रयास विफल रहे, तो यह संघर्ष पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया में अस्थिरता का कारण बन सकता है। दोनों देशों के नागरिकों में डर का माहौल है, और हजारों लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।

















