Gangster Sujit Sinha's prison transfer turned into his final journey; know the full story of the encounter.

16वीं जेल शिफ्टिंग बनी आखिरी यात्रा: गाड़ी पंचर का फायदा उठाने की थी कोशिश, गैंगस्टर सुजीत सिन्हा मुठभेड़ में खत्म हुआ अपराध का सफर

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Gangster Sujit Sinha's prison transfer turned into his final journey; know the full story of the encounter.

जामताड़ा: झारखंड के अपराध जगत का एक बड़ा नाम रहा कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा अब इतिहास बन चुका है। वर्षों तक रंगदारी, हत्या और संगठित अपराध के जरिए पुलिस के लिए चुनौती बना रहा सुजीत रविवार रात जामताड़ा में पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। विडंबना यह रही कि जिस जेल स्थानांतरण को महज एक प्रशासनिक प्रक्रिया माना जा रहा था, वही उसकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित हुआ।

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जानकारी के अनुसार, सुजीत सिन्हा को साहिबगंज मंडल कारा से धनबाद मंडल कारा स्थानांतरित किया जा रहा था। सुरक्षा के मद्देनजर चार वाहनों का काफिला बनाया गया था, जिसमें सशस्त्र पुलिसकर्मी भी तैनात थे। काफिला दोपहर करीब तीन बजे साहिबगंज से रवाना हुआ और देर शाम जामताड़ा थाना क्षेत्र के सुपाईडीह गांव के पास गोविंदपुर-साहिबगंज हाईवे पर पहुंचा। इसी दौरान कैदी वाहन का टायर अचानक पंचर हो गया। वाहन सड़क से उतरकर कच्ची जमीन में फंस गया, जिससे कुछ देर के लिए पूरा काफिला रुक गया।

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पुलिस वाहन को सुरक्षित निकालने और सुजीत को दूसरे वाहन में शिफ्ट करने की तैयारी कर रही थी। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, इसी दौरान सुजीत ने शौचालय जाने की अनुमति मांगी। जैसे ही उसे वाहन से नीचे उतारा गया, उसने मौके का फायदा उठाते हुए एक पुलिसकर्मी का हथियार छीन लिया। इसके बाद उसने फायरिंग करते हुए भागने की कोशिश की। अचानक हुई इस घटना से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई।

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पुलिस ने पहले उसे रुकने की चेतावनी दी, लेकिन जब वह हथियार लेकर भागता रहा और फायरिंग जारी रखी, तो पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की। मुठभेड़ में सुजीत सिन्हा को गोली लगी। मौके पर मौजूद डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

घटना की जानकारी मिलते ही जामताड़ा के पुलिस अधीक्षक शंभु सिंह, अन्य वरिष्ठ अधिकारी और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। पूरे इलाके की घेराबंदी कर घटनास्थल से हथियार, कारतूस और अन्य साक्ष्य जुटाए गए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जांच कराई जा रही है और सभी पहलुओं की पड़ताल की जाएगी।

कभी झारखंड में अपराध का बड़ा चेहरा था सुजीत सिन्हा

सुजीत सिन्हा का नाम वर्ष 2016 के आसपास झारखंड के सबसे सक्रिय गैंगस्टरों में गिना जाने लगा था। उस पर रंगदारी वसूली, कारोबारियों को धमकाने, हत्या, हत्या के प्रयास और कई संगठित आपराधिक मामलों में संलिप्त होने के आरोप थे। रांची समेत कई जिलों में उसका नेटवर्क फैला हुआ था और व्यवसायियों के बीच उसका खौफ था।

जब झारखंड पुलिस ने उसके खिलाफ लगातार अभियान चलाया तो वह राज्य छोड़कर ओडिशा भाग गया। बाद में पुलिस ने उसे ओडिशा के चिल्का झील क्षेत्र से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद से वह विभिन्न जेलों में बंद रहा। सुरक्षा कारणों से उसे समय-समय पर अलग-अलग जेलों में शिफ्ट किया जाता रहा। रविवार को धनबाद जेल ले जाने के दौरान यह उसकी 16वीं जेल शिफ्टिंग थी, लेकिन इस बार वह अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच सका।

पुलिस के सामने भी खड़े हुए कई सवाल

घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। आखिर इतनी कड़ी सुरक्षा के बीच एक हाई-प्रोफाइल कैदी पुलिसकर्मी का हथियार कैसे छीन सका? वाहन पंचर होने के बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किस तरह किया गया? हथियार छीनने की स्थिति कैसे बनी? इन सभी बिंदुओं की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद पूरे घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।

सुजीत सिन्हा की मौत के साथ झारखंड के एक कुख्यात गैंगस्टर का अध्याय जरूर समाप्त हो गया, लेकिन यह मुठभेड़ सुरक्षा व्यवस्था और जेल शिफ्टिंग की प्रक्रिया पर कई गंभीर सवाल भी छोड़ गई है।

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Drishti Now Desk

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