एसी के बजाय सीढ़ियों पर बैठ सुना कर्मचारियों का दर्द: गिरिडीह नगर आयुक्त का ‘अनोखा’ अंदाज चर्चा में

गिरिडीह: आमतौर पर सरकारी दफ्तरों में अधिकारियों का मतलब बंद कमरों और फाइलों के अंबार से लगाया जाता है। लेकिन गिरिडीह नगर निगम के नए नगर आयुक्त बिजय सिंह बिरुआ ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। उनका मंगलवार का एक ‘ग्राउंड जीरो’ निरीक्षण अब शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
सुबह की सैर और औचक निरीक्षण
मंगलवार की सुबह, जब आम तौर पर अधिकारी अपने दफ्तरों में फाइलों के आने का इंतजार करते हैं, बिजय सिंह बिरुआ अपनी मॉर्निंग वॉक के दौरान सीधे नगर निगम कार्यालय पहुँच गए। खास बात यह रही कि वे किसी सरकारी ड्रेस कोड में नहीं, बल्कि बेहद साधारण पहनावे में थे।
सीढ़ियों पर बैठकर ली क्लास
कार्यालय पहुँचने के बाद उन्होंने अंदर जाने के बजाय निगम के मुख्य गेट की सीढ़ियों को ही अपना ‘वर्किंग डेस्क’ बना लिया। उन्होंने बाहर बैठे सफाईकर्मियों और मजदूरों को पास बुलाकर न केवल उनकी समस्याएं सुनीं, बल्कि उन्हें कामकाज में आ रही बाधाओं पर भी खुलकर चर्चा की।
अधिकारियों के इस सरल स्वभाव को देखकर वहां मौजूद कर्मचारी भी हैरान थे। नगर आयुक्त ने करीब दो घंटे तक वहीं बैठकर पूरे सिस्टम को करीब से समझा।
झाड़ू उठाकर सिखाया काम का तरीका
निरीक्षण के दौरान जब उन्होंने देखा कि कुछ कर्मचारी सफाई के सही तरीके से वाकिफ नहीं हैं, तो वे खुद आगे आए। उन्होंने हाथ में झाड़ू थामकर सफाई करने का सही तरीका करके दिखाया। इसके साथ ही उन्होंने:
अनुशासन का पाठ पढ़ाया: बिना ड्रेस के ड्यूटी पर आने वाले कर्मियों को सख्त निर्देश दिए।
उपस्थिति की जांच: रजिस्टर की जांच कर कार्यस्थल पर उपस्थिति सुनिश्चित करने का आदेश दिया।
सुरक्षा का जायजा: दफ्तर में मौजूद फायर सेफ्टी उपकरणों की स्थिति परखी।
‘हम सब एक परिवार हैं’
जब कर्मचारियों और मौजूद लोगों ने उन्हें अंदर चलने का आग्रह किया, तो उन्होंने बेहद विनम्रता से मना कर दिया। उन्होंने कहा,
मैं कोई अलग नहीं हूँ, यह निगम हमारा परिवार है। कर्मचारियों के बीच बैठकर ही उनकी वास्तविक परेशानियों को समझा जा सकता है।”
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