JPSC आंदोलन में बढ़ी अंदरूनी खींचतान: रामअवतार महतो ने कुणाल प्रताप सिंह समेत अन्य पर FIR की मांग की, कोतवाली थाना में दिया आवेदन
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर राजधानी रांची में चल रहा छात्रों का आंदोलन अब अंदरूनी विवाद की वजह से नए मोड़ पर पहुंच गया है। अब तक सरकार और आयोग के खिलाफ एकजुट दिख रहे आंदोलन में फूट पड़ती नजर आ रही है। आंदोलन से जुड़े एक गुट के प्रतिनिधि रामअवतार महतो ने दूसरे गुट से जुड़े कुणाल प्रताप सिंह (डायरेक्टर, एग्जाम फाइटर) समेत कई लोगों के खिलाफ कोतवाली थाना में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए आवेदन दिया है।
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रामअवतार महतो ने अपने आवेदन में बताया है कि वह 14वीं JPSC परीक्षा के अभ्यर्थी हैं और प्रारंभ से ही कथित अनियमितताओं के खिलाफ लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आंदोलन करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि JPSC-JSSC में पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त भर्ती प्रक्रिया की मांग को लेकर “JPSC-JSSC अभ्यर्थी न्याय मंच” के बैनर तले प्रशासन को पूर्व सूचना देकर 25 जुलाई 2026 से मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका में अनिश्चितकालीन सत्याग्रह शुरू किया गया था। बाद में प्रशासनिक निर्देशों और डुरंड कप के आयोजन को देखते हुए 28 जुलाई को धरना स्थल जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम के समीप स्थानांतरित कर दिया गया।

आवेदन के अनुसार, 29 जुलाई को आयोजित संविधान मार्च के बाद कुणाल प्रताप सिंह अपने कुछ सहयोगियों के साथ सत्याग्रह स्थल पहुंचे। रामअवतार महतो का आरोप है कि वहां उनके साथ गाली-गलौज की गई, मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और आंदोलन बंद करने का दबाव बनाते हुए जान से मारने की धमकी दी गई।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि आंदोलनकारियों की सहमति के बिना आंदोलन के नाम पर QR कोड जारी कर धन संग्रह करने का प्रयास किया गया। रामअवतार महतो का कहना है कि उन्होंने आंदोलन की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के उद्देश्य से इसका विरोध किया। विरोध करने पर उन्हें कथित रूप से घेर लिया गया और दोबारा धमकी दी गई।
कोतवाली थाना को दिए गए आवेदन में रामअवतार महतो ने कुणाल प्रताप सिंह, राजेश प्रसाद, रवीन्द्र पासवान, विनय मेहता तथा अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की प्रासंगिक धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही उन्होंने शांतिपूर्ण सत्याग्रह की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए धरना स्थल पर पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती का भी अनुरोध किया है।

इस घटनाक्रम के बाद JPSC अभ्यर्थियों के आंदोलन में स्पष्ट रूप से दो गुट दिखाई देने लगे हैं। एक ओर आंदोलन की मूल मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर संगठन और संचालन को लेकर विवाद सामने आने लगे हैं। इससे आंदोलन की एकजुटता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
फिलहाल, कुणाल प्रताप सिंह की ओर से इस शिकायत और लगाए गए आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। गौरतलब है कि JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच पहले से ही CID कर रही है। इस मामले में अब तक 11 लोगो की गिरफ्तारियां हो चुकी है सोमवार को चौथे दिन JPSC के पूर्व चयरमैन एल – ख्यांग्ते से पूछताछ होनी है फ़िलहाल जांच अभी जारी है। JPSC में हुए अनियमितता के मुद्दे को लेकर राज्यभर के अभ्यर्थी पिछले कई दिनों से आंदोलनरत हैं।

















