AI की उड़ान को तैयार झारखंड, दुनिया के निवेशकों के सामने खुलेगा विकास का नया द्वार

रांची : झारखंड अब केवल खनिज संपदा वाले राज्य की पहचान तक सीमित नहीं रहना चाहता। राज्य सरकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सूचना प्रौद्योगिकी (IT), उद्योग और पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसी उद्देश्य से 8 जुलाई यानी आज और 9 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन में मुख्यमंत्री की मौजूदगी में झारखंड अपनी महत्वाकांक्षी तकनीकी और औद्योगिक विकास की रूपरेखा देश और दुनिया के निवेशकों के सामने पेश करेगा।

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दो दिवसीय इस सम्मेलन में देश-विदेश की करीब 100 अग्रणी आईटी कंपनियों, उद्योगपतियों, निवेशकों, नीति विशेषज्ञों और तकनीकी संस्थानों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। राज्य सरकार उन्हें रांची के विकसित आईटी पार्क, आधुनिक आधारभूत संरचना और झारखंड में उपलब्ध निवेश की संभावनाओं से अवगत कराएगी। सरकार का लक्ष्य झारखंड को निवेश, नवाचार और रोजगार का नया केंद्र बनाना है।

सम्मेलन का सबसे बड़ा आकर्षण वर्ष 2026-31 की ड्राफ्ट एआई नीति का अनावरण होगा। राज्य सरकार पहली बार इस मसौदे को उद्योग जगत और विशेषज्ञों के सामने रखेगी। प्राप्त सुझावों के आधार पर नीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके साथ ही झारखंड एआई मिशन की रूपरेखा भी प्रस्तुत की जाएगी, जिसके माध्यम से शासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और सेवा क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के व्यापक उपयोग का मार्ग प्रशस्त होगा।
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सरकार का मानना है कि एआई और डिजिटल तकनीक के प्रभावी उपयोग से प्रशासन अधिक पारदर्शी, तेज, जवाबदेह और जनोन्मुखी बनेगा। इससे सरकारी योजनाओं की निगरानी बेहतर होगी और नागरिकों तक सेवाओं की पहुंच पहले से अधिक प्रभावी तरीके से सुनिश्चित की जा सकेगी।
निवेश आकर्षित करने के लिए सरकार उद्योगों को कई बड़े प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव भी पेश करेगी। इनमें पूंजीगत निवेश पर 50 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति, स्टांप शुल्क में 100 प्रतिशत छूट तथा बिजली शुल्क में 100 प्रतिशत छूट जैसी सुविधाएं शामिल हैं। सरकार यह भी बताएगी कि झारखंड हर वर्ष 20 हजार से अधिक सूचना प्रौद्योगिकी स्नातक तैयार कर रहा है, जिससे उद्योगों को प्रशिक्षित और कुशल मानव संसाधन की निरंतर उपलब्धता मिल सकेगी।
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कार्यक्रम की शुरुआत 8 जुलाई को दोपहर एक बजे यानी थोड़ी देर बाद पंजीकरण और स्वागत सत्र से शुरू होगी। इसके बाद डिजिटल गवर्नेंस और सूचना प्रौद्योगिकी अवसंरचना पर उच्चस्तरीय चर्चा आयोजित की जाएगी। शाम को “झारखंड के कृत्रिम बुद्धिमत्ता भविष्य की दिशा” विषय पर विशेषज्ञ मंथन करेंगे।
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9 जुलाई को “डेस्टिनेशन झारखंड” सत्र में पर्यटन, निवेश और समावेशी विकास की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा होगी। इसके बाद औद्योगिक प्रोत्साहन और निवेश के अवसरों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। सम्मेलन के समापन पर विभिन्न कंपनियों के साथ निवेश संबंधी समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। राज्य सरकार को उम्मीद है कि इन समझौतों से झारखंड में बड़े निवेश का रास्ता खुलेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
क्यों महत्वपूर्ण है यह सम्मेलन?
यह सम्मेलन झारखंड की अर्थव्यवस्था को खनन आधारित पहचान से आगे बढ़ाकर एआई, आईटी और डिजिटल उद्योगों की दिशा में ले जाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। यदि प्रस्तावित निवेश धरातल पर उतरते हैं, तो राज्य में रोजगार, तकनीकी विकास और डिजिटल अवसंरचना को नई गति मिल सकती है।
















