सियासत में ‘दिल मिलाप’: झारखंड के वित्त मंत्री का ‘बॉर्डर’ पार मिशन!

रांची: झारखंड में इनदिनों वित्त मंत्री अपने सुरक्षा लौटाने को लेकर चर्चा में है लेकिन झारखंड के ‘बॉर्डर पार’ हलचल तेज है। राज्य के वित्त मंत्री (कांग्रेस कोटे से) इन दिनों पड़ोसी राज्यों के चक्कर लगा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि मंज़िल भले ही ‘कमल’ (भाजपा) वाली सरकारें हों, लेकिन मकसद ‘काम’ है।
पहली बाजी: बिहार में ‘बजट’ का ज्ञान-पाठ!
वित्त मंत्री जी पहुंचे पटना, जहां उन्होंने बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की। खबर यह है कि वे बिहार के वित्तीय प्रबंधन का ‘सीक्रेट’ समझने गए थे।
जाहिर है जब झारखंड का बजट 1.56 लाख करोड़ का है और बिहार का 3.5 लाख करोड़ का, तो मंत्री जी का वहां जाना ऐसा ही है जैसे ‘बड़े भाई’ से पूछना कि ‘इतनी जेबें कैसे भरते हो?’ कुल मिलाकर, फाइलें घूमीं, आंकड़े देखे गए और चाय पर चर्चा हुई।
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दूसरी बाजी: छत्तीसगढ़ में ‘सड़क’ का इमोशनल कार्ड!
बिहार के बाद मंत्री जी ने छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय के दरबार में हाजिरी लगाई। मुद्दा था—पुंदाग से बूढ़ा पहाड़ तक की सड़क।
बूढ़ा पहाड़ तक पहुंचना पहले मुश्किल भले होगा , अब मंत्री जी ने ठान लिया है कि छत्तीसगढ़ की 2.7 किमी ज़मीन का ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ (NOC) लेकर ही दम लेंगे। यानी, कांग्रेस के मंत्री अब भाजपाई सीएम से कह रहे हैं—“आप बस हमें रास्ता दे दीजिए, सड़क तो हम खुद बना लेंगे!”
निष्कर्ष: सत्ता का ‘को-वर्किंग स्पेस’!
दिल्ली में दोनों पार्टियां एक-दूसरे को ‘आंखें’ दिखाती हों, लेकिन राज्यों के विकास के ‘मैदान’ में फिलहाल ‘दोस्ती’ का दौर शुरू हो रहा है।
वैसे भी, राजनीति में जब तक ‘काम’ न हो, तब तक ‘राम’ भी याद नहीं आते, बाकी तो राम ही जाने..
क्या यह ‘मुलाकातों का सिलसिला’ आने वाले किसी बड़े गठबंधन की आहट है, या सिर्फ ‘सड़क’ का सीधा साधा चक्कर? वक्त बताएगा!
















