Jmdc coal block story

JSMDC की लापरवाही से राज्य को करोड़ों का नुकसान: सुगिया कोल ब्लॉक सरेंडर, बैंक गारंटी जब्त

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Jmdc coal block story

रांची: झारखंड राज्य खनिज विकास निगम (JSMDC) एक बार फिर वित्तीय कुप्रबंधन और प्रशासनिक चूक के कारण चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार निगम ने बोर्ड की सहमति के बिना ही सुगिया कोल ब्लॉक को सरेंडर करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया है। समय पर उत्पादन शुरू न कर पाने के कारण केंद्र सरकार ने निगम की 16.05 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जब्त कर ली है।

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क्या है पूरा मामला?

JSMDC को वर्ष 2019 में सुगिया कोल ब्लॉक आवंटित किया गया था। नियमों के अनुसार, आवंटन के 32 से 42 महीने के भीतर इसे ऑपरेशनल करना अनिवार्य था। हालांकि, समय सीमा बीत जाने के बाद भी JSMDC उत्पादन शुरू करने में विफल रहा, जिसके चलते केंद्र ने कड़ी कार्रवाई करते हुए यह राशि जब्त कर ली।

MDO खोजने में नाकाम रहा निगम

सुगिया कोल ब्लॉक को सुचारू रूप से चलाने के लिए निगम ने 2025 में माइन डेवलपर एंड ऑपरेटर्स (MDO) के लिए टेंडर निकाला था। कुछ कंपनियों ने शुरुआत में रुचि दिखाई, लेकिन किसी ने भी बोली (Bid) नहीं लगाई। निवेशकों की उदासीनता के बाद, जनवरी 2026 में बिना बोर्ड की अनुमति के इसे सरेंडर करने का निर्णय लिया गया।

भारी वेतन और कोई उत्पादन नहीं

हैरानी की बात यह है कि जहां एक तरफ कोल ब्लॉक से एक रुपये का भी उत्पादन नहीं हुआ है, वहीं दूसरी तरफ इस परियोजना के लिए नियुक्त महाप्रबंधक (GM) माइंस को 1.50 लाख रुपये प्रति माह का वेतन दिया जा रहा है। ये अधिकारी ECL के सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं।

इतिहास से कोई सीख नहीं

यह पहली बार नहीं है जब JSMDC को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा है। इससे पहले पाताल इस्ट कोल ब्लॉक के मामले में भी निगम इसी तरह की विफलता का शिकार हुआ था:

पाताल इस्ट कोल ब्लॉक के लिए 52.86 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जब्त हो चुकी है।

कानूनी लड़ाई लड़ने के बावजूद निगम को सफलता नहीं मिली और अंततः केंद्र ने आवंटन रद्द कर दिया।

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राज्य के आर्थिक संकट पर गंभीर सवाल

राज्य पहले से ही वित्तीय चुनौतियों से जूझ रहा है। बार-बार कोल ब्लॉकों का आवंटन रद्द होना और बैंक गारंटी के रूप में करोड़ों रुपये की बर्बादी राज्य के खजाने पर भारी पड़ रही है। यह स्थिति निगम के कामकाज की कार्यक्षमता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।

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