रूसी तेल खरीद पर भारत पर मंडरा सकता है अमेरिकी टैरिफ का खतरा, नए बिल में 100% शुल्क का प्रस्ताव
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वॉशिंगटन : अमेरिका में रूस के खिलाफ एक नया प्रतिबंध विधेयक (Sanctioning Russia Act) तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसका असर भारत समेत कई देशों पर पड़ सकता है। अमेरिकी सीनेट में पेश किए गए संशोधित बिल में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। इस सूची में भारत और चीन प्रमुख देशों में शामिल हैं।
दरअसल, वर्ष 2025 में पेश किए गए मूल ‘सैंक्शनिंग रशिया एक्ट’ में रूस से ऊर्जा आयात जारी रखने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान था। हालांकि, व्हाइट हाउस और सांसदों के बीच सहमति बनने के बाद बिल के नए मसौदे में इस प्रस्ताव को नरम करते हुए अधिकतम 100 प्रतिशत तक सीमित कर दिया गया है।

इस विधेयक का उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय से मिलने वाले वित्तीय संसाधनों पर दबाव बनाना है, जिन्हें अमेरिका और उसके सहयोगी देश यूक्रेन युद्ध से जोड़कर देखते हैं। बिल में रूस के सरकारी अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों, ऊर्जा परियोजनाओं और तथाकथित “शैडो फ्लीट” पर भी कड़े प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव शामिल है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस विधेयक को व्हाइट हाउस का समर्थन मिल चुका है और अमेरिकी सांसद इसे अगस्त से पहले कांग्रेस से पारित कराने की कोशिश कर रहे हैं। बिल में राष्ट्रपति को राष्ट्रीय हितों के आधार पर कुछ मामलों में प्रतिबंधों से छूट देने का अधिकार भी दिया गया है।
यदि यह कानून बनता है, तो रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदने वाले देशों, विशेषकर भारत और चीन, पर व्यापारिक दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, अंतिम निर्णय अमेरिकी संसद की मंजूरी और राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद ही लागू होगा।
















