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लातेहार: सील अस्पताल में चल रहा था ‘मौत का खेल’, झोला छाप डॉक्टरों ने जच्चा-बच्चा की जान को डाला दांव पर

लातेहार के बालूमाथ में प्रशासन द्वारा सील एम0एस0 अस्पताल में झोला छाप डॉक्टरों का गोरखधंधा पकड़ा गया। बिना लाइसेंस और ऑक्सीजन के हो रहे थे सिजेरियन ऑपरेशन। पढ़ें पूरी रिपोर्ट…

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आशीष कुमार वैद्य/  लातेहार

लातेहार, झारखण्ड: जिले के बालूमाथ से एक बेहद चौंकाने वाली और डराने वाली खबर सामने आई है। यहाँ प्रशासन द्वारा सील किए गए एक अस्पताल में चोरी-छिपे मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा था। बिना डॉक्टर, बिना नर्स और बिना किसी सुरक्षा मानकों के, झोला छाप डॉक्टर सिजेरियन ऑपरेशन को अंजाम दे रहे थे।

क्या है पूरा मामला?

बालूमाथ का ‘एम0एस0 अस्पताल’ जो पहले से ही प्रशासनिक रूप से सील था, उसके भीतर अवैध रूप से स्वास्थ्य सेवाएं जारी थीं। शिकायत मिलने पर जब प्रशासनिक अधिकारी प्रवीण सिंह ने मौके पर दबिश दी, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए।

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प्रशासनिक अधिकारी की जुबानी:

प्रशासनिक अधिकारी प्रवीण सिंह ने बताया:
1 अस्पताल पूरी तरह अवैध और बिना पंजीकरण (Non-Registered) के चल रहा था।
2 यहाँ कोई सर्जन, डॉक्टर या प्रशिक्षित नर्स मौजूद नहीं थी।
झोला छाप लोग मनमाने ढंग से एनेस्थीसिया दे रहे थे।
3 न तो अस्पताल में ऑक्सीजन की सुविधा थी और न ही कोई ICU वार्ड।
4 दवाएं असुरक्षित तरीके से खुले में रखी गई थीं।

मरीजों की व्यथा: ‘कर्जा लेकर आए थे इलाज कराने’

इस अवैध अस्पताल में गरीबों की मजबूरी का फायदा उठाकर 25-25 हजार रुपए वसूले जा रहे थे।
विनीता कुमारी (पेशेंट): “सरकारी अस्पताल में सुविधा नहीं मिली तो यहां आए। ऑपरेशन के लिए 25 हजार मांग रहे हैं, हम लोग कर्ज लेकर पैसे का इंतजाम कर रहे हैं।”
करीना (पेशेंट):“ऑपरेशन के दौरान ऑक्सीजन भी नहीं दी गई। बिना किसी सुरक्षा के बस आधे घंटे में सिजेरियन कर दिया गया।
डॉक्टरों की चेतावनी: ‘असुरक्षित अस्पतालों से बचें’
बालूमाथ CHC के डॉ. दयानंद कुमार और डॉ. चंदन कुमार ने बताया कि अस्पताल सील होने के बावजूद वहां मरीजों के साथ खिलवाड़ हो रहा था। उन्होंने चेतावनी दी है कि:

जो अस्पताल सरकार द्वारा रजिस्टर्ड नहीं हैं, वहां इलाज कराना सीधे तौर पर अपनी जान जोखिम में डालना है। हमने मरीजों को सुरक्षित CHC शिफ्ट किया है।”

प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने एम0एस0 अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी किया है। इसमें 24 घंटे के भीतर अस्पताल के कागजात और कार्यरत स्टाफ की सूची मांगी गई है।

फिलहाल, घटना के बाद से झोला छाप डॉक्टर मौके से फरार हैं।
जाहिर है की यह घटना इस बात का प्रमाण है कि कैसे फर्जी क्लीनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं। दृष्टि नाउ’ (Drishti Now) आप सभी पाठकों से अपील करता है: किसी भी निजी अस्पताल में जाने से पहले उसका पंजीकरण और डॉक्टर की डिग्री जरूर जांचें।

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