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‘मां…’ एक शब्द में सिमटा पूरा संसार, हेमंत सोरेन की पोस्ट ने छुआ भावनाओं का तार

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नेमरा में दिवंगत मां रूपी सोरेन को किया याद, मुख्यमंत्री की छोटी-सी पोस्ट में झलकी मां के प्रति अटूट भावनाएं

नेमरा (रामगढ़)। मां को याद करने के लिए हमेशा शब्दों की जरूरत नहीं होती। कभी-कभी एक छोटा-सा शब्द भी उन तमाम भावनाओं को बयां कर देता है, जिन्हें कह पाना आसान नहीं होता। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा एक शब्द—‘मां…’ कुछ ऐसा ही अहसास कराता है। शनिवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी दिवंगत मां रूपी सोरेन की तस्वीर साझा की। तस्वीर में वह अपनी मां के चित्र के सामने श्रद्धांजलि अर्पित करते नजर आ रहे हैं। तस्वीर के साथ उन्होंने केवल ‘मां…’ लिखा। न कोई लंबा संदेश, न भावनाओं को विस्तार देने वाले शब्द। लेकिन मां को पुकारने वाला यह संबोधन अपने आप में बहुत कुछ कह जाता है।

मां की यादों से जुड़ा नेमरा का घर

मुख्यमंत्री का पैतृक गांव नेमरा सिर्फ उनका पुश्तैनी घर नहीं, बल्कि उनके परिवार की यादों और परंपराओं से भी जुड़ा है। शनिवार सुबह यहीं उन्होंने अपनी दिवंगत मां रूपी सोरेन की स्मृति में स्थानीय परंपरा के अनुसार श्राद्ध संस्कार की रस्में निभाईं। इस दौरान परिवार के सदस्यों के साथ दातून, पानी और भोजन अर्पित करने की पारंपरिक रस्म पूरी की गई। स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार ये रस्में सुबह और शाम निभाई जाती हैं। मां का रिश्ता जीवन के उन रिश्तों में है, जिनकी अहमियत अक्सर शब्दों से परे होती है। बचपन की यादों से लेकर जीवन के कठिन पड़ावों तक, मां की मौजूदगी इंसान के भीतर एक गहरा भावनात्मक आधार बनाती है। उनके जाने के बाद भी उनकी सीख, संस्कार और स्मृतियां जीवन का हिस्सा बनी रहती हैं।

‘मां…’ सिर्फ एक शब्द नहीं, एक एहसास है

हेमंत सोरेन की इस पोस्ट को मां की स्मृति से जुड़ी एक भावनात्मक अभिव्यक्ति के रूप में देखा जा सकता है। तस्वीर के साथ लिखा गया ‘मां…’ यह याद दिलाता है कि सार्वजनिक जीवन में व्यक्ति की चाहे जितनी भी बड़ी पहचान हो, निजी जीवन में मां का स्थान अलग ही रहता है। मां को याद करने के लिए किसी विशेष अवसर की जरूरत नहीं होती। उनकी याद कभी किसी तस्वीर में, कभी घर के किसी कोने में और कभी अचानक मन में उठने वाली एक पुकार में सामने आ जाती है। ‘मां…’ भी ऐसी ही पुकार है, जिसमें अपनापन, स्मृति और एक ऐसे रिश्ते की गहराई महसूस होती है, जिसे शब्दों में पूरी तरह समेट पाना संभव नहीं। मुख्यमंत्री की इस छोटी-सी पोस्ट ने मां और संतान के उस भावनात्मक रिश्ते की ओर ध्यान खींचा है, जो समय के साथ खत्म नहीं होता। मां भले ही आंखों के सामने न हों, लेकिन उनकी यादें और उनसे जुड़ा अपनापन जीवन भर साथ रहता है।

 

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नवीन कुमार

नवीन कुमार

Editor In Chief

नवीन कुमार को पिछले 30 वर्षों से भी अधिक समय से प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव रहा है...इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में बड़े पद पर कार्यरत रहे हैं...नक्सल, क्राइम, खेल, राजनीति,बिज्ञान एवं तकनीकी, पर्यावरण के साथ ही समसामयिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों पर मजबूत पकड़ रही है। खाली समय में उन्हें नई जगहों पर घूमना और फोटोग्राफी करना पसंद है।