झारखण्ड में माओवादियों को बड़ा झटका: 10 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण जिसमे चार महिला नक्सली

झारखण्ड में माओवादियों को बड़ा झटका: 10 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण जिसमे चार महिला नक्सली
रांची, 25 सितंबर : झारखण्ड पुलिस और केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों की संयुक्त कार्रवाई तथा राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के प्रभाव से पश्चिमी सिंहभूम जिले में माओवादी संगठन की पकड़ लगातार कमजोर हो रही है। गुरुवार को कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में सक्रिय भाकपा (माओवादी) के 10 सक्रिय सदस्यों ने पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक (झारखण्ड), सीआरपीएफ और झारखण्ड जगुआर (एसटीएफ) के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया।

आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में एरिया कमेटी सदस्य रांदो बोइपाई उर्फ कांति बोइपाई और दस्ते के सक्रिय सदस्य गार्टी कोड़ा, जॉन उर्फ जोहन पूरती, निरसो सीदू उर्फ आशा, घोनोर देवगम, गोमेया कोड़ा उर्फ टारजन, कैरा कोड़ा, कैरी कायम उर्फ गुलांची, सावित्री गोप उर्फ मुतुरी उर्फ फुटबॉल और प्रदीप सिंह मुण्डाशामिल हैं। ये सभी हत्या, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, यूएपीए और सीएलए एक्ट जैसे गंभीर आपराधिक मामलों में संलिप्त रहे हैं।
झारखण्ड पुलिस के अभियानों का असर
झारखण्ड पुलिस के अनुसार, बीते तीन वर्षों में पुलिस, कोबरा, झारखण्ड जगुआर और अन्य केंद्रीय बलों ने नक्सली संगठनों के खिलाफ कुल 9631 अभियान चलाए। इन अभियानों में 175 नक्सलियोंको गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया, जबकि 10 नक्सली मुठभेड़ में मारे गए। इसके अलावा, भारी मात्रा में हथियार, विस्फोटक और कारतूस भी बरामद किए गए। उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में नए सुरक्षा कैंपोंकी स्थापना ने माओवादी संगठनों के प्रभाव क्षेत्र को और सिमटा है।

आत्मसमर्पण नीति का प्रभाव
राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति के तहत वर्ष 2022 से अब तक 26 नक्सलियोंने आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में वापसी की है। आज के आत्मसमर्पण को सुरक्षा एजेंसियों ने माओवादी संगठन के लिए एक बड़ा झटका करार दिया है। यह नीति नक्सलियों को हथियार छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

सुरक्षा बलों की रणनीति और भविष्य
पश्चिमी सिंहभूम जिले में माओवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए झारखण्ड पुलिस और केंद्रीय बलों की संयुक्त रणनीति कारगर साबित हो रही है। नए सुरक्षा कैंपों और लगातार अभियानों के दबाव में माओवादी संगठन कमजोर पड़ रहा है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि आत्मसमर्पण और अभियानों के इस दोहरे दबाव से माओवादी गतिविधियों को और नियंत्रित किया जाएगा।
















