नक्सली हथियार छोड़ सरकार की पुनर्वास नीति में शामिल हो अन्यथा अंजाम बुरा होगा : DGP तदाशा मिश्रा

नक्सली हथियार छोड़ सरकार की पुनर्वास नीति में शामिल हो अन्यथा अंजाम बुरा होगा : DGP तदाशा मिश्रा

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नक्सली हथियार छोड़ सरकार की पुनर्वास नीति में शामिल हो अन्यथा अंजाम बुरा होगा : DGP तदाशा मिश्रा

झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा में सारंडा के घने जंगलों में सुरक्षा बलों ने ऑपरेशन मेघाबुरु (Operation Meghaburu / Megaburu) के तहत नक्सलवाद के खिलाफ एक बड़ी और निर्णायक सफलता हासिल की है। 36 घंटे चले इस संयुक्त अभियान में भाकपा (माओवादी) के सेंट्रल कमेटी सदस्य पतिराम माझी उर्फ अनल दा (Anal Da) समेत कुल 17 नक्सलियों को मार गिराया गया।

यह ऑपरेशन झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ, कोबरा बटालियन और झारखंड जगुआर (JJ Team) की संयुक्त टीम द्वारा चलाया गया था।ऑपरेशन की पूरी जानकारीऑपरेशन मेघाबुरु गुरुवार को शुरू हुआ और लगभग 35-36 घंटे तक चला। यह कार्रवाई मुख्य रूप से कुमडी (Kumdi) गांव के आसपास के बहादा, छोटानागरा और किरीबुरू थाना क्षेत्र के घने जंगलों में केंद्रित रही।

खुफिया सूचनाओं के आधार पर सुरक्षा बलों ने गहन घुसपैठ की और नक्सलियों के साथ भीषण मुठभेड़ हुई।मारे गए नक्सली: कुल 17 (शुरुआती रिपोर्टों में 15 की पुष्टि हुई, बाद में और शव बरामद होने से संख्या बढ़ी)। इनमें 5 महिला नक्सली भी शामिल हैं।

शीर्ष नेता: पतिराम माझी उर्फ अनल दा – भाकपा (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी सदस्य। उन पर कुल 2.35 करोड़ रुपये (झारखंड सरकार द्वारा 1 करोड़ सहित विभिन्न इनाम) का इनाम था। वे लगभग 149-150 आपराधिक मामलों में वांछित थे और कई राज्यों में सक्रिय रहे थे।
अमित मुंडा, अनमोल, राजेश, बुलबुल पर कई पर थानों से  अलग-अलग इनाम घोषित थे।

बरामद हथियार और सामग्री

मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बलों ने भारी मात्रा में युद्ध सामग्री जब्त की:14 अत्याधुनिक हथियार – जिसमें AK-47 और INSAS राइफल्स शामिल हैं।
बड़ी मात्रा में गोला-बारूद, विस्फोटक सामग्री और अन्य युद्ध उपकरण।

नक्सली हथियार छोड़ सरकार की पुनर्वास नीति में शामिल हो अन्यथा अंजाम बुरा होगा : DGP तदाशा मिश्रा

प्रेस कॉन्फ्रेंस और अधिकारियों के बयान

चाईबासा में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में झारखंड की डीजीपी तदाशा मिश्रा और सीआरपीएफ के आईजी साकेत सिंह ने विस्तृत जानकारी साझा की। उन्होंने इस अभियान को ऐतिहासिक और निर्णायक बताया।

मुख्य बिंदु:

डीजीपी तदाशा मिश्रा: नक्सलियों से स्पष्ट अपील की कि वे बंदूक छोड़कर मुख्यधारा में आएं और सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं। अन्यथा अंजाम इससे भी कठोर होगा। उन्होंने जवानों की बहादुरी की सराहना की और पुरस्कार घोषित किए।
सीआरपीएफ आईजी साकेत सिंह: नक्सली अब अपनी अंतिम सांसें गिन रहे हैं। बचे हुए नक्सलियों से हिंसा का रास्ता छोड़ने और आत्मसमर्पण करने की अपील की। चेतावनी दी कि आगे और सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

पुरस्कार की घोषणा (जवानों के साहस के लिए):कोबरा बटालियन: 4 लाख रुपये
सीआरपीएफ: 1 लाख रुपये
झारखंड पुलिस: 1 लाख रुपये
झारखंड जगुआर: 1 लाख रुपये

नक्सलियों पर घोषित कुल इनामी राशि (जिसमें अनल दा पर 2.35 करोड़ शामिल) बाद में अभियान में शामिल जवानों और अधिकारियों में नियमों के अनुसार वितरित की जाएगी।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे, जिनमें शामिल हैं:आईजी अभियान माइकल राज एस
झारखंड जगुआर के आईजी अनूप बिरथरे
डीआईजी इंद्रजीत महथा
डीआईजी अनुरंजन केरकेट्टा
एसपी अमित रेणु

जाहिर है सारंडा जंगल लंबे समय से माओवादियों का प्रमुख गढ़ रहा है। यह ऑपरेशन नक्सलवाद के खिलाफ झारखंड सरकार और सुरक्षा बलों की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक है। इससे क्षेत्र में नक्सली संगठन की कमर टूटने की उम्मीद है। सरकार का स्पष्ट संदेश है – हिंसा छोड़ो, विकास चुनो। पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वालों को नौकरी, आर्थिक सहायता और सुरक्षा मिलेगी।

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