सरना धर्म कोड नहीं तो जनगणना नहीं, जनगणना नहीं तो परिसीमन नहीं: आदिवासी संगठनों ने दी आंदोलन की चेतावनी

रांची: रांची प्रेस क्लब में शनिवार को आदिवासी छात्र संघ और सरना प्रार्थना सभा की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इसमें आदिवासी धर्म कोड और परिसीमन के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा गया। वक्ताओं ने कहा कि सरना धर्म कोड नहीं होने के कारण जनगणना के दौरान आदिवासी समुदाय की आबादी को दूसरे धर्मों के कॉलम में दर्ज किया जा रहा है। इससे आदिवासी समुदाय की अलग धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान प्रभावित होने के साथ ही आरक्षण और संवैधानिक अधिकारों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई।
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संगठनों ने “सरना धर्म कोड नहीं तो जनगणना नहीं, जनगणना नहीं तो परिसीमन नहीं” का नारा देते हुए केंद्र सरकार से आदिवासी धर्म कोड लागू करने की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समुदाय की वास्तविक जनसंख्या का सही आंकड़ा सामने आना जरूरी है, ताकि भविष्य में होने वाले परिसीमन में उनके हितों की अनदेखी न हो।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठन की ओर से आंदोलन की रणनीति की भी घोषणा की गई। बताया गया कि 18 सितंबर को गुमला से महारैली की शुरुआत की जाएगी। इसके बाद 4 अक्टूबर को रांची के मोरहाबादी मैदान में बड़ी महारैली आयोजित करने का ऐलान किया गया है। वक्ताओं ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर सरकार गंभीरता से विचार नहीं करती है, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। संगठन ने चरणबद्ध तरीके से देशव्यापी आंदोलन, भारत बंद और आर्थिक नाकेबंदी तक की चेतावनी दी है।

आदिवासी संगठनों ने कहा कि सरना धर्म कोड केवल धार्मिक पहचान का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह आदिवासी समुदाय की सामाजिक, सांस्कृतिक और संवैधानिक पहचान से जुड़ा विषय है। सरकार को इस मामले में जल्द निर्णय लेना चाहिए।

















