प्यारा केरकेट्टा की 123वीं जयंती पर शिक्षा, मातृभाषा और संस्कृति संरक्षण का संकल्प

शंभू कुमार सिंह
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सिमडेगा : झारखंड के महान शिक्षाविद, साहित्यकार, समाज सुधारक और जनजागरण के अग्रदूत प्यारा केरकेट्टा की 123वीं जयंती मंगलवार को हेरिटेज-सह-म्यूजियम परिसर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में शिक्षा, मातृभाषा, जनजातीय संस्कृति और सामाजिक समरसता के संरक्षण एवं संवर्धन का सामूहिक संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ उपायुक्त कंचन सिंह, नगर परिषद अध्यक्ष ओलिवर लकड़ा, उपाध्यक्ष दीपक कुमार अग्रवाल, प्यारा केरकेट्टा फाउंडेशन की अध्यक्ष ग्लोरिया सोरेंग तथा सचिव वंदना टेटे ने पारंपरिक नगाड़ा बजाकर किया। इसके बाद अतिथियों ने बाबा प्यारा केरकेट्टा के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
समारोह में बच्चों ने खड़िया भाषा में स्वागत गीत प्रस्तुत किया, जबकि छात्राओं ने बाबा प्यारा केरकेट्टा की कविताओं और रचनाओं का पाठ किया। बिरहोर जनजाति के बच्चों की प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। खड़िया सांस्कृतिक गीत, बेड़ा गीत और अन्य लोक प्रस्तुतियों ने जनजातीय संस्कृति की समृद्ध विरासत को जीवंत कर दिया।
मुख्य अतिथि उपायुक्त कंचन सिंह ने कहा कि बाबा प्यारा केरकेट्टा केवल एक शिक्षाविद और साहित्यकार नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक संरक्षण और जनजागरण के प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि उनकी सोच और कार्य आज भी समाज को दिशा देने का काम कर रहे हैं। उपायुक्त ने फाउंडेशन द्वारा पिछले 24 वर्षों से किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था जनजातीय समाज के शैक्षणिक, सामाजिक और सांस्कृतिक उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
उन्होंने मातृभाषा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भाषा किसी समुदाय की पहचान, इतिहास और संस्कृति की वाहक होती है। प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा में मिलने से बच्चों की सीखने और समझने की क्षमता बेहतर होती है।
नगर परिषद अध्यक्ष ओलिवर लकड़ा ने कहा कि बाबा प्यारा केरकेट्टा का जीवन शिक्षा, समाज सेवा और सांस्कृतिक जागरण का प्रेरणास्रोत है। वहीं नगर परिषद उपाध्यक्ष दीपक कुमार अग्रवाल ने कहा कि सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने 150 से अधिक विद्यालयों की स्थापना में योगदान देकर शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी कार्य किया।
कार्यक्रम में Tata Steel Foundation के लीड शिव शंकर ने बताया कि संस्था झारखंड की 12 जनजातीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए लगभग एक हजार शिक्षण केंद्र संचालित कर रही है, जिनसे प्रतिवर्ष करीब 40 हजार बच्चे जुड़ते हैं।
इस दौरान पात्रिक बिलुंग ने बाबा प्यारा केरकेट्टा के जीवन और योगदान पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्ष 1903 में बोलबा प्रखंड के कसीरा सुंदराटोली गांव में जन्मे बाबा प्यारा केरकेट्टा ने अपना पूरा जीवन शिक्षा, साहित्य, समाज सुधार और जनजागरण को समर्पित किया। उन्होंने एस.एस. हाई स्कूल, सिमडेगा सहित कई शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और खड़िया भाषा-साहित्य को नई पहचान दिलाई।
कार्यक्रम में जिला परिषद सदस्य शांति बाला, अधिवक्ता यूसुफ खान, अलीशा टेटे सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, विद्यार्थी, जनप्रतिनिधि, मीडिया कर्मी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
















