Ranchi Medical Negligence news

रांची: गॉलब्लैडर ऑपरेशन बना जानलेवा, कनीय सचिवालय सहायक की मौत; परिजनों ने अस्पताल पर लगाया लापरवाही का गंभीर आरोप

सामान्य ऑपरेशन’ और मौत का रहस्य: रांची के निजी अस्पताल पर उठे सवाल, परिजनों ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग

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रांची: झारखंड विधानसभा की कनीय सचिवालय सहायक अंजना तिवारी की एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान हुई असामयिक मृत्यु ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और संबंधित चिकित्सक पर घोर चिकित्सीय लापरवाही (Medical Negligence) का आरोप लगाया है। आज विधानसभा परिसर में विधानसभा कर्मियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की और दुख जताया।इसके साथ साथ अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ विरोध भी जताया।

क्या है पूरा मामला?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अंजना तिवारी गॉलब्लैडर के एक सामान्य ऑपरेशन के लिए रांची के सेंटविटा (सेंटविटा अस्पताल) में भर्ती हुई थीं। परिजनों का कहना है कि भर्ती के समय उनकी स्थिति पूरी तरह सामान्य थी और वे स्वयं चलकर अस्पताल गई थीं।

परिजनो का आरोप:

पीड़ित परिवार के अनुसार, ऑपरेशन के दौरान आर्टरी (Artery) में पंक्चर हो गया, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव हुआ। परिजनों का दावा है कि इस दौरान उन्हें 8 यूनिट रक्त और 2 यूनिट प्लाज्मा चढ़ाया गया, जो एक रूटीन सर्जरी के लिहाज से बेहद असामान्य है। आरोप यह भी है कि मरीज को ठंडा रक्त चढ़ाया गया, जिससे उनकी स्थिति बिगड़ती गई और अंततः ‘मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर’ की स्थिति पैदा हो गई।

क्या हुआ अंतिम समय में?

स्थिति नाजुक होने पर उन्हें 24 मई की रात आनन-फानन में भगवान महावीर अस्पताल में शिफ्ट किया गया, जहां इलाज के दौरान 26 मई की सुबह लगभग 9 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। मृतका की 16 वर्षीय पुत्री के सिर से मां का साया उठ गया है।

जांच की मांग:

इस पूरे मामले ने आम जनता के स्वास्थ्य के प्रति सुरक्षा और अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गहरा अविश्वास पैदा कर दिया है। परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि इस तथाकथित चिकित्सीय लापरवाही की निष्पक्ष जांच हो और दोषी चिकित्सक तथा अस्पताल प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई की जाए।

अस्पताल प्रबंधन से बात करने की कोशिश की गई लेकिन अस्पताल की ओर से फ़ोन उठाने के बाद कोई स्पेसिफिक जानकारी नही दी गयी

Disclaimer: यह खबर परिजनों द्वारा दिए गए बयानों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है।

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