भारत के डीजीएमओ की प्रेस कॉन्फ्रेंस: ‘जरूरत पड़ने पर अपने अगले मिशन के लिए तैयार’, ‘याचना नहीं, अब रण होगा’
भारत के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (डीजीएमओ) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने आज नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर और भारत-पाकिस्तान के बीच हाल के तनावों पर विस्तृत जानकारी दी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में वायुसेना के एयर मार्शल एके भट्टी, नौसेना के वाइस एडमिरल एएन प्रमोद और मेजर जनरल एसएस शारदा भी मौजूद थे।
ऑपरेशन सिंदूर: आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई
डीजीएमओ ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर 7 मई को शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला लेना था, जिसमें 26 लोग मारे गए थे। इस ऑपरेशन के तहत भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। लेफ्टिनेंट जनरल घई ने कहा, “हमारा लक्ष्य केवल आतंकियों और उनकी बुनियादी संरचना को नष्ट करना था, न कि पाकिस्तानी सेना के खिलाफ कार्रवाई करना।” इस ऑपरेशन में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए, जिनमें आईसी-814 अपहरण और पुलवामा हमले जैसे बड़े आतंकी हमलों के जिम्मेदार यूसुफ अजहर, अब्दुल मलिक रऊफ और मुदस्सिर अहमद शामिल थे।
भारत-पाक डीजीएमओ वार्ता: युद्धविराम पर चर्चा
डीजीएमओ ने बताया कि भारत और पाकिस्तान के डीजीएमओ के बीच आज शाम 5 बजे हॉटलाइन पर बातचीत होने वाली है, जो पहले दोपहर 12 बजे निर्धारित थी। यह वार्ता 10 मई को दोनों देशों के बीच हुए युद्धविराम समझौते को मजबूत करने के लिए है। घई ने कहा कि 10 मई को पाकिस्तानी डीजीएमओ मेजर जनरल काशिफ चौधरी ने युद्धविराम का प्रस्ताव रखा था, जिसे भारत ने स्वीकार किया। हालांकि, कुछ ही घंटों बाद पाकिस्तान ने इस समझौते का उल्लंघन करते हुए सीमा पर गोलीबारी और ड्रोन हमले किए।
पाकिस्तान को कड़ा संदेश
लेफ्टिनेंट जनरल घई ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा, “अगर पाकिस्तान ने कोई और उकसावे की कार्रवाई की, तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत केवल डीजीएमओ स्तर पर ही पाकिस्तान से बात करेगा और कश्मीर या सिंधु जल संधि जैसे मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं होगी। भारत ने अमेरिका को भी साफ कर दिया है कि वह कश्मीर मुद्दे पर किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं करेगा।
भारतीय सेना की ताकत और तैयारियां
एयर मार्शल एके भट्टी ने बताया कि भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तानी ड्रोन हमलों को नाकाम करते हुए कई हाई-टेक ड्रोन और विमानों को मार गिराया। उन्होंने नूर खान और रहीमयार खान एयरबेस पर किए गए हमलों के वीडियो भी दिखाए। वाइस एडमिरल प्रमोद ने कहा कि भारतीय नौसेना पूरी तरह तैयार है और जरूरत पड़ने पर कराची सहित किसी भी लक्ष्य को निशाना बनाने में सक्षम है। डीजीएमओ ने जोर देकर कहा कि सभी भारतीय सैन्य ठिकाने और उपकरण पूरी तरह कार्यरत हैं और भविष्य में किसी भी मिशन के लिए तैयार हैं।
सीमा पर शांति की वापसी
भारतीय सेना ने बताया कि 11 और 12 मई की रात जम्मू-कश्मीर और अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति रही। सीमा के पास के गांवों में जीवन सामान्य हो रहा है, और 32 हवाई अड्डों पर नागरिक उड़ानें फिर से शुरू हो गई हैं। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सीमा पर प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और राहत कार्यों का जायजा लिया।
प्रधानमंत्री की उच्च स्तरीय बैठक
प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान और तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में सीमा की स्थिति और डीजीएमओ वार्ता से पहले रणनीति पर चर्चा हुई।
डीजीएमओ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में रामधारी सिंह दिनकर की कविता का जिक्र करते हुए कहा, “याचना नहीं, अब रण होगा।” उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति पर अडिग है और किसी भी उकसावे का मुंहतोड़ जवाब देगा। आज शाम की डीजीएमओ वार्ता में युद्धविराम की शर्तों, सीमा सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

















