जुगाड़ के भरोसे वीर कुंवर सिंह पार्क की सुरक्षा, नगर परिषद की कार्यशैली पर उठे सवाल

सिमडेगा: शहर के बीचोंबीच स्थित वीर कुंवर सिंह पार्क की बदहाली नगर परिषद की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही है। कभी बच्चों के मनोरंजन और शहरवासियों के लिए सुकून का ठिकाना रहा यह बाल उद्यान पिछले छह-सात वर्षों से बंद पड़ा है। अब स्थिति यह है कि पार्क के जर्जर प्रवेश द्वार को टीन, लोहे के टुकड़ों और तारों के सहारे बंद रखने की कोशिश की जा रही है।

पार्क के मुख्य गेट पर लगे लोहे के ढांचे में जगह-जगह जंग लग चुका है और कई हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ऐसे में सफाईकर्मी टूटे टीन और लोहे के तारों का सहारा लेकर गेट को संभालने में जुटे हैं। सीमित संसाधनों के बीच कर्मियों की यह कोशिश सराहनीय है, लेकिन सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा के लिए इस तरह के अस्थायी इंतजाम नगर परिषद की व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं।

शहर के प्रमुख स्थान पर स्थित इस पार्क में कभी बच्चों की चहल-पहल रहती थी। शहरवासी भी यहां समय बिताने पहुंचते थे। लेकिन लंबे समय से बंद रहने के कारण अब इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। नगर परिषद के कर्मियों द्वारा पार्क की साफ-सफाई तो की जाती है, लेकिन गेट की स्थायी मरम्मत और उद्यान के जीर्णोद्धार की दिशा में अपेक्षित पहल नजर नहीं आती।

स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि वीर कुंवर सिंह की जयंती या विजय महोत्सव जैसे आयोजनों के दौरान प्रतिमा और आसपास के क्षेत्र की विशेष साफ-सफाई कराई जाती है। इस दौरान गेट की रंगाई-पुताई भी होती है। हालांकि, नियमित रखरखाव और जरूरी मरम्मत के अभाव में पार्क की स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिख रहा है।

जर्जर गेट को टीन, तार और लोहे के टुकड़ों से बांधकर रखने का प्रयास करने वाले सफाईकर्मी अपने स्तर पर जिम्मेदारी निभा रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या शहर की सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा इसी तरह जुगाड़ के भरोसे छोड़ी जा सकती है? गेट की खराब स्थिति के कारण आवारा पशुओं के परिसर में प्रवेश करने और पार्क को नुकसान पहुंचने की आशंका भी बनी रहती है। पार्क के प्रवेश द्वार की मरम्मत के साथ-साथ पूरे परिसर की स्थिति का आकलन कराना जरूरी है, ताकि लंबे समय से बंद पड़े उद्यान को फिर से उपयोग के योग्य बनाया जा सके।

नगर परिषद पर शहर की सार्वजनिक सुविधाओं और संपत्तियों के रखरखाव की जिम्मेदारी है। ऐसे में शहर के बीच स्थित एक प्रमुख पार्क की यह स्थिति नागरिकों के बीच सवाल पैदा करती है। क्या नगर परिषद के पास गेट की स्थायी मरम्मत के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं, या फिर इस ओर प्राथमिकता के साथ ध्यान नहीं दिया जा रहा है?

वीर कुंवर सिंह पार्क की समस्या केवल जर्जर गेट तक सीमित नहीं है। छह-सात वर्षों से बंद बाल उद्यान शहर में सार्वजनिक स्थलों के रखरखाव और उनके बेहतर उपयोग की व्यवस्था पर भी सवाल उठाता है। अब जरूरत है कि नगर परिषद अस्थायी उपायों से आगे बढ़कर गेट की स्थायी मरम्मत कराए और पार्क के जीर्णोद्धार के लिए ठोस कदम उठाए। इससे न केवल सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि बच्चों और शहरवासियों को भी यह पार्क दोबारा उपयोग के लिए मिल सकेगा।

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