रामरेखा धाम विकास समिति की नई कार्यकारिणी गठित, सेवा व समर्पण का दिया संदेश
शंभू कुमार सिंह
सिमडेगा : सिमडेगा के प्रसिद्ध आस्था केंद्र रामरेखा धाम में मंगलवार को रामरेखा धाम विकास समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। बैठक की शुरुआत धाम के महंत सह अध्यक्ष अखंड दास द्वारा ब्रह्मलीन बाबा के समक्ष पुष्प अर्पित कर पूजा-अर्चना से हुई।
बैठक में सर्वप्रथम पुरानी समिति के कार्यों की समीक्षा की गई और उनके योगदान को सराहा गया। इसके बाद प्राप्त सेवा आवेदनों एवं कार्यों के आधार पर विचार-विमर्श करते हुए सर्वसम्मति से नई कार्यकारिणी की घोषणा की गई।
नई समिति में महंत अखंड दास को अध्यक्ष एवं संचालक की जिम्मेदारी दी गई है। सह संचालक के रूप में सचिदानंद पंडा को नियुक्त किया गया। इसके अलावा वरिष्ठ उपाध्यक्ष अमरनाथ बमलिया, उपाध्यक्ष ईश्वर प्रसाद साहू, सचिव ओमप्रकाश साहू, उप सचिव लक्ष्मीनारायण सिंह, कोषाध्यक्ष ओमप्रकाश शर्मा तथा संगठन मंत्री अशोक सिंह को महत्वपूर्ण दायित्व सौंपे गए। समिति में मीडिया प्रभारी, कार्यालय प्रमुख, विधि प्रमुख, आंकेंक्षक एवं संपादक सहित अन्य पदों पर भी सदस्यों की नियुक्ति की गई।
बैठक में ग्रामीण एवं नगर क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ विभिन्न प्रखंडों के सदस्यों को भी जिम्मेदारियां सौंपी गईं, ताकि धाम के विकास कार्यों को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जा सके।
इस अवसर पर संत उमाकांत जी एवं संत तुलसी दास ने अपने आशीर्वचन में सभी सदस्यों को एकजुट होकर समाजहित में कार्य करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता भगवान श्रीराम के आदर्शों पर चलते हुए अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करें।
अपने संबोधन में महंत अखंड दास ने कहा कि रामरेखा धाम केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और संस्कारों को सशक्त करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने सभी सदस्यों से सेवा, समर्पण और अनुशासन को जीवन का मूल मंत्र बनाने तथा जरूरतमंदों तक पहुंचकर कार्य करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्य संरक्षक द्वारा अध्यक्ष का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया, वहीं संत उमाकांत एवं तुलसी दास को कोर समिति द्वारा सम्मानित किया गया। उपस्थित लोगों को अंगवस्त्र एवं हनुमान चालीसा वितरित कर सेवा कार्य के लिए प्रेरित किया गया। बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीणों एवं गणमान्य लोगों की भागीदारी रही।


















