20260129 133853

सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी के नए समानता नियमों पर लगाई रोक, कहा- अस्पष्ट और दुरुपयोग की आशंका

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा हाल ही में अधिसूचित “उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले विनियमन, 2026” पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस ज्योमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के दौरान इन नियमों को अस्पष्ट बताते हुए कहा कि इनमें दुरुपयोग होने का खतरा है।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

कोर्ट ने केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। साथ ही, पुराने 2012 के नियमों को फिलहाल लागू रखने का आदेश दिया है ताकि जाति-आधारित भेदभाव के शिकार छात्रों को कोई संरक्षण न मिले। मामले की अगली सुनवाई अब 19 मार्च 2026 को होगी।

यूजीसी ने 13 जनवरी 2026 को ये नए विनियमन जारी किए थे, जिनमें उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव रोकने के लिए “इक्विटी कमेटी” (समानता समिति) गठित करने का प्रावधान था। ये समितियां भेदभाव की शिकायतों की जांच करतीं और समानता को बढ़ावा देने का काम करतीं। कमेटी में ओबीसी, एससी, एसटी, दिव्यांगजन और महिलाओं के प्रतिनिधि शामिल करने को कहा गया था।

हालांकि, याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि इन नियमों में भेदभाव की परिभाषा गैर-समावेशी है, जो सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ दुरुपयोग का कारण बन सकती है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया इन दलीलों पर गौर किया और कहा कि नियमों की भाषा स्पष्ट नहीं है, जिससे समाज में विभाजन बढ़ सकता है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी की, “हम जानते हैं कि क्या हो रहा है… अगर अदालत हस्तक्षेप नहीं करेगी तो खतरनाक परिणाम हो सकते हैं।” पीठ ने नियमों को “वाग” (अस्पष्ट) और “मिसयूज” (दुरुपयोग) के योग्य बताया।

Share via
Share via