Employees Posted at the Same Location for Three Years to Be Removed

झारखंड में ट्रेजरी घोटाले पर बड़ा एक्शन: 3 साल से एक ही जगह जमे कर्मचारी हटाए जाएंगे, ट्रांसफर के लिए भी ‘नो-रिपीट’ पॉलिसी लागू

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झारखंड में ट्रेजरी घोटाले पर बड़ा एक्शन: 3 साल से एक ही जगह जमे कर्मचारी हटाए जाएंगे, ट्रांसफर के लिए भी ‘नो-रिपीट’ पॉलिसी लागू

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17 अप्रैल को धनबाद में हुई बैठक की तस्वीर

रांची/धनबाद:  झारखंड के सरकारी महकमों में हुए 150 करोड़ रुपये के बहुचर्चित ट्रेजरी घोटाले (फर्जी वेतन निकासी) के बाद राज्य सरकार अब ‘क्लीनअप ऑपरेशन’ के मूड में है। वित्त सचिव प्रशांत कुमार के कड़े आदेश के बाद अब जिला प्रशासन ने भी मोर्चा संभाल लिया है। सबसे बड़ी गाज उन बाबुओं और क्लर्कों पर गिरने वाली है, जो वर्षों से एक ही कुर्सी पर कुंडली मारकर बैठे हैं।

कुर्सी से मोह पड़ेगा भारी, अब नहीं चलेगा ‘सेटिंग’ का खेल

सरकार ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार के सिंडिकेट को तोड़ने के लिए तबादला नीति में बड़े बदलाव किए गए हैं। इसके तहत दो मुख्य नियम लागू किए गए हैं:
1. 3 साल की डेडलाइन: बिल क्लर्क, अकाउंटेंट और अन्य कर्मियों का, जो एक ही स्थान पर 3 साल पूरे कर चुके हैं, उनका तत्काल तबादला होगा।
2. नो-रिपीट पॉलिसी:तबादला उस जगह पर बिल्कुल नहीं होगा, जहां कर्मचारी पहले कभी तैनात रह चुका हो। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि पुराना नेटवर्क दोबारा सक्रिय न हो सके।

17 अप्रैल को धनबाद डीसी का अल्टीमेटम: “गड़बड़ी हुई तो नपेंगे अधिकारी”

17 अप्रैल 2026 को धनबाद के न्यू टाउन हॉल में आयोजित समीक्षा बैठक में डीसी आदित्य रंजन ने कड़ा रुख अख्तियार किया था। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब सरकारी खजाने की सुरक्षा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा।

17 अप्रैल को हुई बैठक की बड़ी बातें:

मुख्य सचिव का निर्देश तीन साल से जमे हुए कर्मचारियों का ट्रांसफर हो
औचक निरीक्षण: जिला स्तरीय टीमें अब कभी भी कार्यालयों में धमक सकती हैं।
रिकॉर्ड खंगालना शुरू: पिछले वर्षों के भुगतान, सर्विस बुक, जन्म तिथि और बैंक खातों का गहन सत्यापन (Cross-Verification) किया जाएगा।
DDO की जिम्मेदारी: किसी भी तरह की वित्तीय त्रुटि या फर्जीवाड़े के लिए सीधे तौर पर निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी (DDO) उत्तरदायी होंगे।
HRMS पोर्टल: सभी कर्मियों का डाटा और बैंक डिटेल्स को पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपडेट और प्रमाणित करना होगा।

इन 7 जिलों पर है पैनी नजर
ट्रेजरी घोटाले के तार मुख्य रूप से इन जिलों से जुड़े हैं, जहां जांच की आंच सबसे तेज है:

रांची, धनबाद, बोकारो, हजारीबाग, रामगढ़, पलामू, जमशेदपुर और देवघर।

क्यों जरूरी था यह एक्शन?

जांच में सामने आया कि 150 करोड़ रुपये की फर्जी निकासी किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि सिस्टम के भीतर बैठे ‘दीमकों’ ने की थी। लंबे समय तक एक ही सीट पर रहने के कारण कर्मचारियों ने निकासी की प्रक्रिया में सेंध लगाने का रास्ता खोज लिया था। अब सरकार के इस ‘रैंडम ट्रांसफर’ और ‘सख्त वेरिफिकेशन’ से ऐसे फर्जीवाड़ों पर लगाम लगने की उम्मीद है।
ब्यूरो रिपोर्ट, दृष्टि नाउ

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