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ट्रंप के ‘पांच विमान’ दावे ने मचाया सियासी तूफान, संसद के मानसून सत्र में हंगामे के आसार

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत-पाकिस्तान संघर्ष को लेकर ताजा बयान ने भारतीय राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने दावा किया है कि मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य संघर्ष के दौरान चार या पांच लड़ाकू विमान मार गिराए गए थे। इस बयान ने विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का मौका दे दिया है, और 21 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में इस मुद्दे पर जोरदार हंगामा होने की संभावना है।

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ट्रंप ने व्हाइट हाउस में रिपब्लिकन सांसदों के साथ एक रात्रिभोज के दौरान कहा कि विमान हवा में मार गिराए जा रहे थे। चार या पांच, लेकिन मुझे लगता है कि पांच जेट गिराए गए। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि ये विमान किस देश के थे। इससे पहले पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसने मई 2025 में हुए संघर्ष में भारत के पांच विमान मार गिराए थे, जिसे भारत ने सिरे से खारिज किया था।

कांग्रेस का सरकार पर हमला

कांग्रेस ने ट्रंप के इस बयान को तुरंत लपकते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संसद में स्पष्टीकरण की मांग की है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “संसद के मानसून सत्र से ठीक दो दिन पहले, ‘ट्रंप मिसाइल’ 24वीं बार दागी गई। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रोका और इस बार नया खुलासा किया कि पांच जेट गिराए गए।” उन्होंने सवाल उठाया कि क्या व्यापार समझौतों के लिए भारत ने अपने सम्मान से समझौता किया?

भारत सरकार का रुख

भारत सरकार ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच युद्धविराम द्विपक्षीय बातचीत और पाकिस्तान के सैन्य अभियान महानिदेशक (डीजीएमओ) के संपर्क के बाद हुआ था, न कि किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी ट्रंप और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिका का नाम लिए बिना युद्धविराम को द्विपक्षीय निर्णय बताया।

पहलगाम हमला और ऑपरेशन सिंदूर भी मुद्दा

विपक्षी दलों का ‘इंडिया’ गठबंधन मानसून सत्र में न केवल ट्रंप के दावों, बल्कि पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भी सरकार को घेरने की तैयारी में है। 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था, जिसके तहत पाकिस्तान के 9 आतंकी ठिकानों को नष्ट किया गया। विपक्ष का आरोप है कि इस ऑपरेशन को अमेरिकी दबाव में रोका गया, जिस पर सरकार की चुप्पी सवाल खड़े कर रही है।

संसद में हंगामे की पूरी संभावना

21 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र में विपक्ष ने पहलगाम हमले, ऑपरेशन सिंदूर, ट्रंप के बयानों, बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR), और विदेश नीति जैसे आठ प्रमुख मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने की रणनीति बनाई है। कांग्रेस, टीएमसी, सपा, और शिवसेना (यूबीटी) जैसे दलों ने एकजुट होकर इन मुद्दों को उठाने का फैसला किया है। टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने पहलगाम हमले को खुफिया विफलता करार देते हुए सवाल उठाया कि इसके बावजूद खुफिया प्रमुख को सेवा विस्तार क्यों दिया गया?

संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त तक चलेगा, और इस दौरान सरकार छह विधेयकों को पेश करने की तैयारी में है, जिसमें 90 साल पुराना विमान अधिनियम बदलने वाला विधेयक भी शामिल है। हालांकि, विपक्ष की आक्रामक रणनीति और ट्रंप के बयानों से उपजा विवाद सत्र को हंगामेदार बना सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सत्र न केवल विधायी कामकाज, बल्कि सियासी रणक्षेत्र का भी गवाह बनेगा।

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