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चाईबासा में जंगली हाथी का आतंक: एक रात में 6 लोगों की मौत, ग्रामीणों में दहशत

चाईबासा में जंगली हाथी का आतंक: एक रात में 6 लोगों की मौत, ग्रामीणों में दहशत

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चाईबासा , 7 जनवरी : झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में एक झुंड से बिछड़े दंतैल (tusker) जंगली हाथी के हमलों से आतंक का माहौल है। पिछले छह दिनों में इस हाथी ने अलग-अलग घटनाओं में 17 लोगों की जान ले ली है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। वन विभाग की टीम हाथी को जंगल में खदेड़ने की कोशिश कर रही है, लेकिन ग्रामीणों में गुस्सा और डर बढ़ता जा रहा है। सिर्फ एक दिन में छह लोगों को हांथी ने कुचल डाला है।

हालिया घटनाएं:
6 जनवरी की रात: नोवामुंडी और हाटगमहरिया क्षेत्र में हाथी ने दो अलग-अलग हमलों में 6 लोगों की मौत कर दी, जिनमें एक परिवार के चार सदस्य शामिल हैं। एक अन्य घटना में तीन लोगों की जान गई।

5 जनवरी: गोइलकेरा ब्लॉक में एक व्यक्ति और उसके दो बच्चों को हाथी ने कुचल दिया, जबकि एक बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई।

1-3 जनवरी: शुरुआती दिनों में अलग-अलग गांवों में 3-4 मौतें हुईं।

वन विभाग के चाईबासा डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर आदित्य नारायण के अनुसार, यह दंतैल हाथी झुंड से अलग हो गया है और उग्र होकर गांवों में घुस रहा है। विभाग ने पश्चिम बंगाल से विशेषज्ञ टीम बुलाई है, जो हाथी को ट्रैंकुलाइज या जंगल में खदेड़ने का प्रयास कर रही है।

ग्रामीणों की स्थिति:

हाथी के खौफ से कई गांवों के लोग रात में घर छोड़कर जंगल में मशाल जलाकर गुजार रहे हैं। शाम ढलते ही दहशत फैल जाती है। ग्रामीण वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं और स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।

यह मानव-हाथी संघर्ष की गंभीर समस्या का हिस्सा है, जहां जंगलों के घटते आवास के कारण हाथी गांवों की ओर आ रहे हैं। झारखंड में पिछले कुछ वर्षों में सैकड़ों ऐसी मौतें हो चुकी हैं।अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि रात में बाहर न निकलें और हाथी दिखने पर शोर मचाकर भगाएं। उम्मीद है कि जल्द ही हाथी को नियंत्रित कर लिया जाएगा।

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