हिंडाल्को मुरी में मजदूरों का गुस्सा फूटा, गेट प्रवेश और वेतन कटौती के आरोप; विधायक अमित महतो ने संभाला मोर्चा
मुरी स्थित हिंडाल्को इंडस्ट्रीज में मजदूरों से जुड़े विवाद ने अब आंदोलन का रूप ले लिया है। श्रमिकों ने कंपनी प्रबंधन पर मनमानी, वेतन कटौती, बिना पूर्व सूचना काम से रोकने और गेट पर प्रवेश प्रतिबंधित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मजदूरों का कहना है कि लंबे समय से कंपनी में काम करने के बावजूद उन्हें स्थायी रोजगार और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों का लाभ नहीं मिल रहा है।
श्रमिकों के अनुसार, कंपनी में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग प्रत्यक्ष अथवा ठेका व्यवस्था के माध्यम से काम करते हैं। उनका आरोप है कि वर्षों तक काम लेने के बाद भी नौकरी की स्थिरता सुनिश्चित नहीं की जा रही है। वहीं, प्रबंधन के खिलाफ आवाज उठाने वाले मजदूरों पर दबाव बनाए जाने का भी आरोप आंदोलनकारियों ने लगाया है।

बिना नोटिस गेट प्रवेश रोकने का आरोप
आंदोलन कर रहे मजदूरों का सबसे बड़ा आरोप यह है कि कुछ श्रमिकों को बिना स्पष्ट नोटिस या प्रक्रिया बताए कंपनी परिसर में प्रवेश से रोक दिया गया। श्रमिकों का कहना है कि काम पर जाने के बाद गेट पर रोक दिए जाने से उनकी रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है। मजदूरों ने वेतन में कटौती किए जाने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पहले से ही ठेका व्यवस्था में काम करने वाले श्रमिकों की आर्थिक स्थिति कमजोर है और वेतन में कटौती से उनके परिवारों के सामने मुश्किलें बढ़ रही हैं।

वर्षों से ठेका व्यवस्था में काम करने का मुद्दा
आंदोलन में ठेका श्रमिकों की स्थिति भी प्रमुख मुद्दा बनकर सामने आई है। मजदूरों का कहना है कि कई लोग लंबे समय से कंपनी से जुड़े काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें स्थायी रोजगार नहीं मिला है। मजदूरों का आरोप है कि एक ही परिसर और उत्पादन व्यवस्था में काम करने के बावजूद स्थायी और ठेका श्रमिकों की सुविधाओं में अंतर है। उनका कहना है कि सुरक्षा, वेतन और रोजगार की स्थिरता से जुड़े मुद्दों का समाधान होना चाहिए।

सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल
आंदोलनकारियों ने कंपनी में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि खतरनाक औद्योगिक गतिविधियों में काम करने वाले मजदूरों के लिए सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन होना चाहिए। मुरी हिंडाल्को संयंत्र का सुरक्षा और पर्यावरण से जुड़ा इतिहास भी पहले विवादों में रहा है। अप्रैल 2019 में प्लांट के बॉक्साइट अवशेष भंडारण क्षेत्र की दीवार टूटने से रेड मड फैल गया था। उस समय एक संविदा श्रमिक के लापता होने और चार लोगों के घायल होने की जानकारी कंपनी ने दी थी।
बाद में हिंडाल्को ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि घटना में किसी व्यक्ति की मौत नहीं हुई। कंपनी ने यह भी बताया था कि घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए कदम उठाए गए।

विधायक अमित महतो ने संभाला मोर्चा
मजदूरों के आंदोलन के बीच सिल्ली विधायक अमित कुमार महतो के सामने आने से मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा में आ गया है। मजदूरों की समस्याओं को लेकर विधायक ने प्रबंधन के खिलाफ आवाज उठाई है और श्रमिकों के पक्ष में खड़े होने की बात कही है। अमित महतो पहले भी मुरी हिंडाल्को से जुड़े मामलों को लेकर सवाल उठा चुके हैं। मार्च 2026 में झारखंड विधानसभा में उन्होंने मुरी हिंडाल्को द्वारा रेड मड की आपूर्ति से जुड़े मामले को उठाया था। सरकार ने उस मामले की दोबारा जांच कराने की बात कही थी।

स्थानीय लोगों के रोजगार का सवाल
हिंडाल्को मुरी क्षेत्र में लंबे समय से औद्योगिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। कंपनी के अनुसार मुरी में उसकी अलुमिना रिफाइनरी 1948 में स्थापित हुई थी और वर्तमान में इसकी क्षमता 4.5 लाख टन प्रतिवर्ष है।ऐसे में स्थानीय मजदूरों का कहना है कि कंपनी के आसपास रहने वाले लोगों को रोजगार में प्राथमिकता मिलनी चाहिए। आंदोलनकारियों ने स्थानीय लोगों के लिए रोजगार, श्रमिकों की नौकरी की सुरक्षा और काम करने की बेहतर परिस्थितियों की मांग उठाई है।

आंदोलन उग्र होने की चेतावनी
मजदूरों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रबंधन ने उनकी मांगों पर बातचीत नहीं की और विवाद का समाधान नहीं निकाला, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। आंदोलनकारियों ने कंपनी का काम प्रभावित करने की चेतावनी भी दी है।मजदूरों का कहना है कि उनका उद्देश्य कंपनी को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि श्रमिकों की समस्याओं का समाधान कराना है। उनका दावा है कि यदि समय रहते प्रबंधन और मजदूरों के बीच बातचीत होती है तो विवाद का शांतिपूर्ण समाधान संभव है।
दूसरी जगह भी हिंडाल्को के खिलाफ आंदोलन
गौरतलब है कि सितंबर 2026 में झारखंड के दूसरे इलाकों में भी हिंडाल्को से जुड़े रोजगार और स्थानीय सुविधाओं के सवाल पर आंदोलन की खबरें सामने आई हैं। लोहरदगा में बॉक्साइट डंपिंग यार्ड के मजदूरों ने रोजगार बहाल करने सहित कई मांगों को लेकर आंदोलन किया और 7 अक्टूबर को कंपनी मुख्यालय पर धरना देने की घोषणा की है।
वहीं गुमला के घाघरा क्षेत्र में सड़क और अन्य स्थानीय मांगों को लेकर हिंडाल्को के खिलाफ ग्रामीणों का आंदोलन सितंबर में कई दिनों तक चला। वार्ता के बाद भी समाधान नहीं निकलने की खबर सामने आई थी।
जाहिर है मुरी में चल रहा मौजूदा विवाद भी इसी व्यापक सवाल से जुड़ता दिखाई दे रहा है कि खनन और औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े क्षेत्रों में स्थानीय लोगों और श्रमिकों को रोजगार, सुरक्षा तथा बुनियादी सुविधाओं का कितना लाभ मिल रहा है।

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