सरयू रॉय ( saryu roy) ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र कोरोना जांच शुल्क घटाने का अनुरोध किया ।

सरयू रॉय ( saryu roy) ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र कोरोना जांच शुल्क घटाने का अनुरोध किया ।

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झारखंड के वरिष्ठ नेता सरयू रॉय (saryu roy)ने RT-PCR जाँच के लिए झारखण्ड सरकार द्वारा निर्धारित शुल्क (रूपये 400) प्रति को घटाकर 200 रुपये करने का आग्रह किया है इसके लिए उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव को पत्र लिखा है पत्र का मजमून कुछ ऐसा है पढ़िए —
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झारखंड राज्य में कोरोना के ओमीक्रॉन वायरस का प्रसार तेजी से हो रहा है। संक्रमण गति में तीव्रता इस वायरस की विषेशता के रूप में सामने आई है। नतीजतन कोरोना जाँच कराने वाले व्यक्तियों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। उपर्युक्त संदर्भित आदेश के अनुसार फिलहाल झारखण्ड राज्य में जाँच की संशोधित दर प्रति जाँच 400 रूपये (पीपीई किट शुल्क एवं सभी कर सहित) निर्धारित की गई है। इसके पूर्व दिनांक 01.12.2020 को निर्गत विभागीय आदेश के अनुसार यह शुल्क 800 रूपये प्रति जाँच की दर से लेने का आदेश हुआ था। इसके अतिरिक्त निवास स्थान से आरटीपीसीआर नमूना संग्रह किये जाने हेतु अतिरिक्त 200 रूपये की राशि निर्धारित की गई है।
उपर्युक्त के संदर्भ में दो बिन्दुओं की ओर आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूँ।
1. विदित है कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के महानिदेशक श्री आर.सी. भार्गव का एक वक्तव्य समाचार पत्रों में प्रकाशित हुआ है, जिसके अनुसार कोविड जाँच करने वाले किट की कीमतों में भारी गिरावट आई है। सम्प्रति यह बाजार में 50 रूपये प्रति किट की दर से उपलब्ध है। इसे ध्यान में रखते हुए आवश्यक प्रतीत हो रहा है कि कोरोना जाँच के के लिए झारखण्ड राज्य में निर्धारित 400 रूपये प्रति जाँच की दर में संशोधन किया जाय और इसे प्रति जाँच 100 रूपये से नीचे लाया जाय।
2. उपर्युक्त संदर्भित विभागीय आदेश की कंडिका-2 में उल्लेख है कि निजी प्रयोगशालाओं के लिये ‘‘मरीज के निवास स्थान पर जाकर RT-PCR सैम्पल संग्रहण किये जाने हेतु अतिरिक्त 200 रूपये की राशि निर्धारित की गई। Rapid Antigen Test से निगेटिव हुए सभी symptomatic मरीजों का जाँच RT-PCR से करना अनिवार्य है’’ सरकार का यह आदेश अस्पष्ट है। इस आदेश की स्पष्ट व्याख्या सरकार द्वारा की जानी चाहिए। इस आदेश में स्पष्ट नहीं है कि यदि निजी प्रयोगशाला का कोई व्यक्ति नमूना एकत्र करने के लिए किसी के घर जाता है तो यह शुल्क नमूना देने वाले घर के प्रत्येक सदस्य से 200 रूपये की दर से वसूला जायेगा या एक घर के सभी सदस्यों के लिए यह शुल्क 200 रूपये माना जायेगा। चुकि किसी के घर से जाकर नमूना संग्रह करना एक सेवा का कार्य है। इसलिए मेरी समझ से किसी घर के सभी सदस्यों की संख्या के लिए यह शुल्क एकमुश्त 200 रूपये होना चाहिए। जानकारी मिल रही है कि किसी घर से नमूना संग्रह करने वाले निजी प्रयोगशालाओं के कर्मी शुल्क के रूप में घर के जाँच कराने वाले प्रत्येक सदस्य से 200 रूपये की दर से वसूल रहे हैं। यानी किसी घर में पाँच व्यक्ति का नमूना संग्रह करना है तो कुल एक हजार रूपये की राशि वसूली जा रही है।
चूकि ओमीक्रॉन का प्रसार काफी तेज गति से हो रहा है। फलतः एक घर में परिवार के एक से अधिक सदस्य इससे ग्रसित हो सकते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए यदि यह शुल्क किसी के घर जाकर नमूना लेने के लिए सेवा शुल्क के रूप में लिया जा रहा है तो वह नमूना देने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए 200 रूपये न होकर यह एकमुश्त 200 रूपये होना चाहिए। इसे भी घटाकर 100 रूपया करने पर विचार होना चाहिए।
इस तरह सरयू राय ने झारखंड के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर यह आग्रह किया है की कोरोना जांच के लिए जो ₹400 शुल्क लिए जाते हैं वह घटाकर आधा यानी नहीं ₹200 कर दिया जाए। कोरोना जांच का शुल्क अगर आधा कर दिया जाए तो यह आम आदमी के लिए मददगार होगा।

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