झारखंड में परिसीमन को लेकर आदिवासी समाज लामबंद, मंत्री बंधु तिर्की के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल के राजू से मिला

रांची: झारखंड में प्रस्तावित लोकसभा और विधानसभा परिसीमन की आहट के साथ ही राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इसे लेकर आदिवासी समाज ने मोर्चा खोल दिया है। पूर्व मंत्री बंधु तिर्की के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने एआईसीसी (AICC) झारखंड प्रभारी के. राजू से मुलाकात कर राज्य की अनुसूचित जनजाति (ST) आरक्षित सीटों की सुरक्षा को लेकर अपनी गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं।
“आरक्षण से समझौता बर्दाश्त नहीं”
प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया के दौरान झारखंड में एसटी वर्ग के लिए आरक्षित किसी भी लोकसभा या विधानसभा सीट की संख्या में कमी नहीं की जानी चाहिए। साथ ही, उन्होंने एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है कि यदि भविष्य में सीटों की कुल संख्या में इजाफा होता है, तो ST और SC वर्गों के लिए आरक्षित सीटों का कोटा भी उसी अनुपात में बढ़ाया जाना चाहिए।

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बैठक के दौरान अखिल भारतीय आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय समन्वयक शशि पन्ना ने कहा कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व को सुरक्षित रखने के लिए महज आश्वासन काफी नहीं हैं। उन्होंने मांग की कि संविधान के अनुच्छेद 330(2) और 332(3) में संशोधन किया जाना चाहिए ताकि आदिवासी आरक्षित सीटों को भविष्य के लिए सुरक्षित किया जा सके। इस कानूनी पक्ष को मजबूत करने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता सुभाषिश रशीक सोरेन और डॉ. रामचन्द्र उरांव के नेतृत्व में एक विशेष विधिक प्रारूप तैयार किया जा रहा है।
बंधु तिर्की ने बताया कि आदिवासी समाज इस मुद्दे को राष्ट्रीय पटल पर ले जाना चाहता है। प्रतिनिधिमंडल ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मिलकर अपनी बात रखने का समय मांगा है। इसके अलावा, 30 अगस्त को रांची के मोरहाबादी मैदान में आयोजित होने वाली ‘आदिवासी एकता महाजुटान रैली’ में राहुल गांधी को बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित करने का प्रस्ताव भी दिया गया है।
केवल परिसीमन ही नहीं, बैठक में केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की ने ‘सरना धर्म कोड’ का मुद्दा भी पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने पार्टी नेतृत्व से मांग की कि सरना धर्म कोड को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने के लिए कांग्रेस पार्टी अपनी पूरी ताकत लगाए।
एआईसीसी प्रभारी के. राजू ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों को गंभीरता से सुना। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे इस मामले को लेकर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से समन्वय स्थापित करेंगे और राहुल गांधी के साथ प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात कराने का हर संभव प्रयास करेंगे।

















