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सड़क के अभाव में खाट पर झूल रही ग्रामीणों की जिंदगी, फिर सामने आया ‘खाट पर सिस्टम’

झारखंड के सिमडेगा जिले के ग्रामीण इलाकों में सड़क की कमी का खामियाजा स्थानीय लोगों को लगातार भुगतना पड़ रहा है। एक बार फिर ‘खाट पर सिस्टम’ की तस्वीर सामने आई है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की बदहाली को उजागर करती है।

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मामला डालियामरचा गांव का है, जहां गर्भवती हना गुड़िया को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिवार ने ममता वाहन को बुलाया, लेकिन सड़क न होने की वजह से वाहन गांव तक नहीं पहुंच सका। मजबूरी में परिजनों ने हना को खाट पर लिटाकर करीब डेढ़ किलोमीटर कच्चे और ऊबड़-खाबड़ रास्ते से मुख्य सड़क तक पहुंचाया, जहां वाहन इंतजार कर रहा था। इस दौरान महिला की जान जोखिम में थी, लेकिन परिजनों ने हिम्मत नहीं हारी और उसे अस्पताल पहुंचाया।

यह कोई पहला मामला नहीं है। मात्र चार दिनों के भीतर यह दूसरी घटना है। इससे पहले बानो प्रखंड के डुमरिया मारिकेल गांव से भी ऐसी ही तस्वीर सामने आई थी, जहां सड़क के अभाव में ग्रामीणों को खाट के सहारे मरीज को अस्पताल पहुंचाना पड़ा।

कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी ने इस स्थिति को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा, “गांवों तक सरकार की योजनाएं और विकास पहुंचाने के लिए त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था बनाई गई है। अगर गांव की सरकार ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभाए, तो हालात बदल सकते हैं।” उन्होंने इस मामले में संज्ञान लेने और सुधार के लिए कदम उठाने का आश्वासन दिया।

एक तरफ सरकार चांद और मंगल पर पहुंचने की बात करती है, वहीं सिमडेगा के ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। सड़क जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी न होने से ग्रामीणों की जिंदगी खाट के भरोसे झूल रही है। आने वाले समय में हालात कैसे बदलेंगे, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन ग्रामीणों को अपने हक और बेहतर सुविधाओं के लिए संघर्ष करना होगा।

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