जमशेदपुर से 201 कांवरियों का जत्था रवाना, कांवरिया बोल बम सेवा संघ की पहल, विधायक सरयू राय ने किया रवाना

जमशेदपुर से 201 कांवरियों का जत्था रवाना, कांवरिया बोल बम सेवा संघ की पहल, विधायक सरयू राय ने किया रवाना

Share
Link copied

जमशेदपुर से 201 कांवरियों का जत्था रवाना, कांवरिया बोल बम सेवा संघ की पहल, विधायक सरयू राय ने किया रवाना

सावन माह की भक्ति और आस्था का रंग अब पूरे शबाब पर है। इसी क्रम में जमशेदपुर स्थित कांवरिया बोल बम सेवा संघ की ओर से प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी एक विशाल कांवरिया जत्था सुल्तानगंज से देवघर के लिए रवाना हुआ। इस बार संघ की ओर से 201 श्रद्धालु—महिलाएं एवं पुरुष—इस पवित्र यात्रा में शामिल हुए हैं।
इन श्रद्धालुओं को पूर्व मंत्री एवं वर्तमान विधायक श्री सरयू राय ने पूजा-अर्चना कर रवाना किया।

सावन की पवित्रता और भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा को दर्शाते हुए कांवरिया बोल बम सेवा संघ द्वारा इस यात्रा का आयोजन एक भव्य रूप में किया गया। रवाना होने से पहले सभी श्रद्धालुओं ने विधिवत पूजन किया और “बोल बम”, “हर-हर महादेव” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

शुभ अवसर पर उपस्थित जमशेदपुर के वरिष्ठ नेता एवं विधायक सरयू राय ने सभी कांवरियों को तिलक लगाकर, फूल-मालाओं से सम्मानित किया और विधिवत पूजा कर रवाना किया
भगवान भोलेनाथ के दरबार में कांवर लेकर जाना केवल यात्रा नहीं, बल्कि एक आत्मिक अनुभव होता है। मैं सभी कांवरियों को इस पवित्र यात्रा के लिए शुभकामनाएं देता हूँ। ईश्वर सबकी मनोकामनाएं पूर्ण करें।”

इस यात्रा में शामिल 201 श्रद्धालुओं में महिलाओं की संख्या उल्लेखनीय रही, जो शिवभक्ति के प्रति समर्पण और नारी सहभागिता का सुंदर उदाहरण है। कांवरिया बोल बम सेवा संघ ने यात्रा की हर आवश्यक व्यवस्था की है,
यात्रा मार्ग में भोजन, जल और आराम की व्यवस्था
प्राथमिक उपचार के लिए चिकित्सा किट
अनुशासित दल व्यवस्था, टोली प्रमुखों की नियुक्ति
सभी कांवरियों को एक जैसी वेशभूषा (यूनिफॉर्म) प्रदान की गई
यात्रा सुल्तानगंज से प्रारंभ होगी, जहाँ से कांवर में उत्तरवाहिनी गंगा जल लेकर सभी शिवभक्त करीब 105 किलोमीटर की पदयात्रा करते हुए बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर पहुंचेंगे और जलाभिषेक करेंगे।

कांवरिया बोल बम सेवा संघ बीते कई वर्षों से इस प्रकार की यात्रा आयोजित करता आ रहा है। संघ के प्रमुखों ने बताया कि उनका उद्देश्य केवल कांवर यात्रा करवाना नहीं है, बल्कि पूरे मार्ग में भक्ति के साथ सेवा और अनुशासन बनाए रखना भी है। इस कार्य में स्थानीय युवाओं और समाजसेवियों का भी भरपूर सहयोग मिलता है।

कांवर यात्रा केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि यह एक मानसिक, शारीरिक और आत्मिक साधना का माध्यम है। भक्तगण तपस्या के रूप में इस कठिन यात्रा को पूर्ण

ABOUT THE AUTHOR
drishtinow

drishtinow