बिहार चुनाव 2025 : क्या Gen Z वोटर बनेंगे ‘गेम चेंजर’? विशेष रिपोर्ट
नवीन कुमार
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण का मतदान कल, 6 नवंबर को होगा। इस चरण में राज्य के 243 में से 121 विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता अपने अधिकार का प्रयोग करेंगे। कुल 3.75 करोड़ से अधिक मतदाता 1314 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। इनमें 1.98 करोड़ पुरुष और 1.76 करोड़ महिला मतदाता शामिल हैं।
लेकिन इस चुनाव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि Gen Z वोटर यानी 29 वर्ष तक के युवा निर्णायक भूमिका में नजर आ सकते हैं।
24 प्रतिशत मतदाता हैं Gen Z
पूरे राज्य में इस बार कुल 7.44 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें 1.77 करोड़ (लगभग 24%) मतदाता Gen Z वर्ग से हैं। यानी लगभग हर चौथा वोट इसी वर्ग के पास है। कई विधानसभा क्षेत्रों में इनकी संख्या इतनी अधिक है कि नतीजों की दिशा बदल सकती है।
नए सोच वाले युवा मतदाता
Gen Z वोटरों की पहचान तकनीक से जुड़ी पीढ़ी के रूप में होती है। ये वे युवा हैं जो मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया के साथ बड़े हुए हैं। इनकी सोच पारंपरिक मतदाताओं से काफी अलग है। ये न तो जातीय समीकरणों में बंधे हैं, न ही भावनात्मक अपील से प्रभावित होते हैं। रोजगार, शिक्षा, पारदर्शिता, पलायन और विकास इनके लिए मुख्य मुद्दे हैं।
काम और नतीजों के आधार पर वोटिंग
Gen Z वोटर इश्यू बेस्ड वोटिंग को प्राथमिकता देते हैं। ये सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं और रियल-टाइम में अपनी राय बनाते हैं। इन्हें न केवल पार्टी का चेहरा बल्कि उसके काम और नीतियों का ट्रैक रिकॉर्ड भी प्रभावित करता है।
पार्टियों की नजर ‘Gen Z’ पर
राजनीतिक दल भी इस वर्ग को आकर्षित करने में जुटे हैं।
RJD युवाओं के बीच ‘नौकरी और न्याय’ के नारे के साथ पहुंच बना रही है। वहीं BJP-JDU गठबंधन ‘विकसित बिहार, सशक्त युवा’ के संदेश के जरिए युवाओं को जोड़ने की कोशिश कर रहा है। सोशल मीडिया अभियान, डिजिटल प्रचार और इंटरएक्टिव संवाद के जरिए सभी दल इस पीढ़ी से सीधा संवाद स्थापित करना चाहते हैं।
निर्णायक भूमिका में ‘Game Changer Generation’
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार का चुनाव सिर्फ राजनीतिक दलों की जंग नहीं, बल्कि “Gen Z बनाम पुरानी राजनीति” की टक्कर भी साबित हो सकता है। पहले और दूसरे चरण में इनकी सक्रिय भागीदारी और मतदान प्रतिशत किसी भी गठबंधन के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।
यानी 2025 का चुनाव उस नई पीढ़ी का है, जो अब सिर्फ दर्शक नहीं, बल्कि परिवर्तन की दिशा तय करने वाली ‘Game Changer Generation’ बन चुकी है।
















