सारंडा में नक्सलवाद का ‘अंतिम अध्याय’: मिसिर बेसरा का नेटवर्क ध्वस्त, 25 नक्सली कल करेंगे आत्मसमर्पण
रांची: झारखंड के सारंडा जंगल, जिसे कभी नक्सलियों का सबसे अभेद्य और खूंखार गढ़ माना जाता था, अब शांति और विकास की नई इबारत लिख रहा है। राज्य में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे निर्णायक अभियान में बड़ी सफलता हाथ लगी है। गुरुवार सुबह 11 बजे झारखंड पुलिस मुख्यालय में 25 सक्रिय नक्सली आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में शामिल होंगे।
मिसिर बेसरा का साम्राज्य बिखरा
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, एक करोड़ रुपये का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा का पूरा दस्ता अब बिखर चुका है। सुरक्षाबलों के निरंतर दबाव और चलाए गए संयुक्त ऑपरेशनों के कारण संगठन के भीतर भारी भगदड़ मच गई है। सूत्रों के मुताबिक, संगठन की कमर टूटने के बाद मिसिर बेसरा खुद भी सारंडा छोड़कर भूमिगत हो गया है।
मुख्यधारा में लौटने वाले प्रमुख चेहरे
कल आत्मसमर्पण करने वाले 25 नक्सलियों में संगठन के कई महत्वपूर्ण सदस्य शामिल हैं। इनमें प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:
सागेन अंगरिया, गुलशन मुंडा, प्रभात मुखिया, जयंती, बसुमती, दर्शन, सुलेमान, किशोर, मुकेश, करण टियू, मुनीराम, बिरसा, दामू पड़ेया, लादू तिरिया, बैजनाथ, सुनीता और बसंती।
सुरक्षाबलों की रणनीतिक जीत
यह सफलता झारखंड पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और झारखंड जगुआर के जवानों की कड़ी मेहनत का परिणाम है। पिछले कई महीनों से सारंडा के दुर्गम इलाकों में इन तीनों बलों ने घेराबंदी और सर्च ऑपरेशन चलाकर नक्सलियों के लिए रसद और मूवमेंट के सभी रास्ते बंद कर दिए थे। इस ‘ऑपरेशन सारंडा’ ने नक्सलियों के मनोबल को पूरी तरह तोड़ दिया है।
बदलाव की नई सुबह
जानकर इसे राज्य में नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में सबसे निर्णायक मोड़ मान रहे हैं। उनके मुताबिक आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली हिंसा के रास्ते से तंग आ चुके हैं और अब सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाकर सामान्य जीवन जीना चाहते हैं।
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