रांची : परिमल नाथवानी का नामांकन वैध, INDIA गठबंधन में बेचैनी
रांची: झारखंड में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के नामांकन को रिटर्निंग ऑफिसर ने मंजूर कर लिया है, जिसके बाद कांग्रेस-जेएमएम गठबंधन ने इसे चुनावी प्रक्रिया पर हमला बताया है।
नामांकन पर विवाद
9 जून को नामांकन पत्रों की जांच के दौरान कांग्रेस और जेएमएम ने नाथवानी के पेपर पर आपत्ति दर्ज कराई थी। उनके अनुसार, नाम की स्पेलिंग, क्रम और कुछ व्यक्तिगत जानकारियों में गड़बड़ी थी। हालांकि, 10 जून को रिटर्निंग ऑफिसर ने सभी आपत्तियों को खारिज करते हुए नाथवानी का नामांकन वैध घोषित कर दिया।
कांग्रेस-जेएमएम का पक्ष:
राजेश ठाकुर और दीपिका पांडे सिंह ने कहा कि नियमों की व्याख्या अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग तरीके से की जा रही है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए मामले को चुनाव आयोग या अदालत में ले जाने की बात कही।
भाजपा का पक्ष:
मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने साफ कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर ने नियमों के अनुसार फैसला लिया है। उन्होंने विपक्ष पर हार का डर दिखाने का आरोप लगाया।
अब मैदान में तीन उम्मीदवार
बैद्यनाथ राम (झारखंड मुक्ति मोर्चा)
प्रणव झा (कांग्रेस)
परिमल नाथवानी (NDA समर्थित निर्दलीय)
झारखंड विधानसभा की 81 सीटों में INDIA गठबंधन (जेएमएम + कांग्रेस + RJD + CPI-ML) के पास करीब 56 विधायक हैं, जबकि NDA के पास कम संख्या है। फिर भी नाथवानी को खड़ा करके NDA ने गठबंधन को क्रॉस वोटिंग का खतरा पैदा कर दिया है।
राज्यसभा चुनाव का गणित
राज्यसभा चुनाव में जनता सीधे वोट नहीं करती। विधायक वोट देते हैं। एक सीट जीतने के लिए लगभग 28 प्रथम वरीयता वाले वोट (quota) जरूरी हैं। निर्दलीय उम्मीदवार के मैदान में आने से क्रॉस वोटिंग की आशंका बढ़ जाती है, जिससे पूरा समीकरण बदल सकता है।परिमल नाथवानी पहले दो बार (2008-2020) राज्यसभा सांसद रह चुके हैं और झारखंड को अपनी कर्मभूमि मानते हैं। उद्योगपति के रूप में उनकी पहचान है।
जश्न और गुस्सा
भाजपा ने नामांकन वैध होने पर जश्न मनाया, जबकि कांग्रेस-जेएमएम ने विरोध प्रदर्शन किया। दोनों पक्ष अब अपने विधायकों को एकजुट रखने और वोटबैंक साधने की कवायद में जुट गए हैं। 18 जून को मतदान होगा और उसी दिन नतीजे घोषित किए जाएंगे। यह चुनाव सिर्फ दो सीटों का नहीं, बल्कि दोनों गठबंधनों की साख और अनुशासन की परीक्षा भी बन गया है।
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