Upset over being ignored by public representatives, villagers built a road themselves, repairing a two-kilometer stretch through voluntary labor.

जनप्रतिनिधियों की अनदेखी से नाराज़ ग्रामीणों ने खुद बनाई सड़क, श्रमदान से दो किमी मार्ग को किया दुरुस्त

Upset over being ignored by public representatives, villagers built a road themselves, repairing a two-kilometer stretch through voluntary labor.
Upset over being ignored by public representatives, villagers built a road themselves, repairing a two-kilometer stretch through voluntary labor.

शंभू कुमार सिंह

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सिमडेगा: सदर प्रखंड के कोचेडेगा पंचायत अंतर्गत चरकापत्थल से टोकीडुबा होते हुए माहरा टोली तक जाने वाली जर्जर सड़क से परेशान ग्रामीणों ने आखिरकार खुद ही सड़क निर्माण का जिम्मा उठा लिया। वर्षों से सड़क निर्माण की मांग पूरी नहीं होने और जनप्रतिनिधियों व प्रशासन की उदासीनता से नाराज़ ग्रामीणों ने श्रमदान कर करीब दो किलोमीटर लंबे कच्चे मार्ग को चलने योग्य बनाने का कार्य शुरू कर दिया।

ग्रामीणों ने सड़क के गड्ढों को भरने और रास्ते को समतल करने का काम सामूहिक रूप से किया। इस अभियान में पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं, युवा और बच्चे भी बढ़-चढ़कर शामिल हुए। मौके पर पंचायत समिति सदस्य भगवती देवी भी मौजूद रहीं और ग्रामीणों के प्रयासों की सराहना की।

टोकीडुबा के पारा शिक्षक शंकर प्रधान ने बताया कि क्षेत्र के विकास को लेकर न तो जनप्रतिनिधि गंभीर हैं और न ही प्रशासन। सड़क निर्माण को लेकर कई बार आवेदन और मांग की गई, लेकिन कोई पहल नहीं हुई। उन्होंने कहा कि ग्रामीण समय-समय पर एकजुट होकर श्रमदान के माध्यम से सड़क को चलने लायक बनाते हैं।

उन्होंने बताया कि क्षेत्र में सब्जी उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है, लेकिन सड़क की खराब स्थिति के कारण किसान समय पर अपनी उपज बाजार तक नहीं पहुंचा पाते। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसके अलावा यह क्षेत्र कबूतर पालन और अन्य ग्रामीण व्यवसायों के लिए भी पहचान रखता है, लेकिन आवागमन की समस्या विकास में बड़ी बाधा बनी हुई है।

ग्रामीणों के अनुसार हल्की बारिश के बाद सड़क की हालत इतनी खराब हो जाती है कि पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। साइकिल, मोटरसाइकिल, ऑटो और चारपहिया वाहनों का गांव तक पहुंचना लगभग असंभव हो जाता है। कई बार लोगों को वाहन धक्का देकर या उठाकर ले जाने की नौबत आ जाती है।

कृषि पर निर्भर अधिकांश परिवारों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने के लिए करीब दो किलोमीटर तक सिर या कंधे पर ढोकर चरकापत्थल ले जाना पड़ता है, जहां से उन्हें वाहन उपलब्ध हो पाते हैं। बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है तथा ग्रामीणों को अपने वाहन गांव से दूर खड़े करने पड़ते हैं।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान सड़क निर्माण के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही गांव की समस्याओं को भुला दिया जाता है। कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को सड़क की बदहाली से अवगत कराने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि खराब सड़क का असर बच्चों की पढ़ाई, मरीजों के इलाज और दैनिक आवागमन पर पड़ रहा है। इसी मजबूरी में गांववासियों ने श्रमदान कर सड़क को दुरुस्त करने की पहल की है, ताकि लोगों को स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और बाजार तक पहुंचने में कुछ राहत मिल सके। ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से चरकापत्थल-टोकीडुबा-माहरा टोली सड़क का स्थायी निर्माण जल्द कराने की मांग की है।

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