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दुमका : आजादी के 8 दशक बाद ‘लाठीपहाड़’ को मिली नई पहचान: प्रधानमंत्री जनमन योजना ने बदली गांव की तकदीर

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दुमका: झारखंड के दुमका जिले का लाठीपहाड़ गांव, जो कभी अपने दुर्गम रास्तों और अभावों के लिए जाना जाता था, अब विकास की नई इबारत लिख रहा है। घने जंगलों और ऊंची पहाड़ियों के बीच बसे इस ऐतिहासिक गांव में आजादी के करीब 84 वर्षों बाद अब पक्की सड़क पहुंची है। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में योगदान देने वाला यह गांव दशकों तक मुख्यधारा से कटा रहा, लेकिन अब प्रधानमंत्री जनमन योजना ने यहां की तस्वीर बदल दी है।

विकास के अभाव में दम तोड़ती उम्मीदें

दुमका मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित लाठीपहाड़ के निवासियों के लिए सड़क का न होना एक अभिशाप जैसा था। गांव के लोगों के लिए हर दिन संघर्ष भरा था। बच्चों की पढ़ाई प्राथमिक स्तर के बाद बंद हो जाती थी, क्योंकि 12 किलोमीटर के पहाड़ी रास्ते को पार करना बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं था। सबसे भयावह स्थिति तब होती थी, जब गांव में कोई बीमार पड़ जाता था। एम्बुलेंस की सुविधा न होने के कारण ग्रामीणों को गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को खाट पर लादकर मीलों पैदल चलने के लिए मजबूर होना पड़ता था।

प्रधानमंत्री जनमन योजना बनी ‘लाइफलाइन’

साल 2025 में लाठीपहाड़ के लिए एक नई सुबह हुई। केंद्र सरकार की ‘प्रधानमंत्री जनमन योजना’ के तहत बस्का से लाठीपहाड़ तक सड़क निर्माण की महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी मिली। करीब दो करोड़ रुपये की लागत से पहाड़ों को काटकर 2.410 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया गया। दुमका सांसद नलिन सोरेन द्वारा शिलान्यास किए जाने के बाद, महज एक साल के भीतर इस दुर्गम मार्ग को आवाजाही के योग्य बना दिया गया।

बदल गई जिंदगी की रफ्तार

अब यह सड़क लाठीपहाड़ के निवासियों के लिए महज कंक्रीट का रास्ता नहीं, बल्कि विकास की नई लाइफलाइन है।

शिक्षा: बच्चे अब नियमित रूप से स्कूल जा पा रहे हैं।
स्वास्थ्य: मरीजों को अब अस्पताल तक ले जाने के लिए खाट का सहारा नहीं लेना पड़ता।
अर्थव्यवस्था: ग्रामीण अपनी वन उपज को अब आसानी से बाजार तक पहुंचा पा रहे हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है।

विकास अब हमारे दरवाजे पर है”

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने के बाद उन्हें पहली बार महसूस हो रहा है कि वे देश के विकास का अभिन्न हिस्सा हैं। जहां एक ओर ग्रामीण इस उपलब्धि से खुश हैं, वहीं उन्होंने शासन-प्रशासन से आसपास के अन्य दुर्गम गांवों को भी सड़क से जोड़ने की मांग की है।

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