महाअभियान: जशपुर बनेगा ‘ग्रीन हब’, कल 18 जून को 2 लाख सीड बॉल से हरा-भरा होगा जिला
नवीन कुमार
जशपुर: पर्यावरण संरक्षण की दिशा में छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला एक ऐतिहासिक पहल करने जा रहा है। कल, 18 जून को पूरे जिले में ‘हरित जशपुर बीजारोपण अभियान’ का शंखनाद होगा। इस महाअभियान का उद्देश्य न केवल बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण करना है, बल्कि आधुनिक तकनीक ‘सीड बॉल’ (Seed Ball) के माध्यम से एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाना और पर्यावरण के प्रति सामुदायिक चेतना को जागृत करना है।
क्यों खास है यह ‘सीड बॉल’ तकनीक?
वन विभाग द्वारा अपनाई जा रही ‘सीड बॉल’ तकनीक इस अभियान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। अक्सर पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में पौधों का रोपण करना शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण और खर्चीला होता है। सीड बॉल तकनीक में बीजों को मिट्टी, खाद और जैविक पदार्थों के मिश्रण में लपेटकर एक गेंद का आकार दिया जाता है। बारिश के मौसम में ये बीज स्वतः ही अनुकूल परिस्थितियों में अंकुरित होकर पौधों का रूप ले लेते हैं। इससे उन कठिन क्षेत्रों में भी वनीकरण संभव हो जाता है जहाँ मानव पहुंच मुश्किल है।
गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड पर नजर
वन मंडल जशपुर ने इस अभियान के लिए व्यापक रूपरेखा तैयार की है। इस प्रयास को ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में दर्ज कराने की तैयारी है। जिले के प्रमुख स्थानों जैसे सोगड़ा आश्रम के सामने स्थित भैरव पहाड़, कुनकुरी और पत्थलगांव के विभिन्न क्षेत्रों में युद्धस्तर पर बीजारोपण किया जाएगा। यह प्रयास न केवल जिले के ‘ग्रीन कवर’ को बढ़ाएगा, बल्कि स्थानीय जैव विविधता (Biodiversity) को भी पुनर्जीवित करेगा।
“पर्यावरण संरक्षण सबका सरोकार”
इस अभियान के प्रति उत्साह बढ़ाते हुए जिला कलेक्टर रोहित व्यास और वन मंडलाधिकारी शशि कुमार ने इसे ‘जन-आंदोलन’ का रूप देने का आह्वान किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
सामूहिक जिम्मेदारी: पर्यावरण बचाना सिर्फ वन विभाग का काम नहीं, बल्कि हर नागरिक का नैतिक कर्तव्य है।
पीढ़ीगत निवेश: आज लगाया गया एक बीज आने वाली पीढ़ियों के लिए शुद्ध हवा, पानी और बेहतर जलवायु का आधार बनेगा।
सक्रिय भागीदारी: प्रशासनिक अधिकारियों ने जिले के स्वयंसेवी संगठनों, स्कूलों, कॉलेजों और आम नागरिकों से कल के कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर शामिल होने की अपील की है।
भविष्य की राह: जशपुर का ‘ग्रीन फ्यूचर’
यह अभियान आने वाले वर्षों में जशपुर को एक ‘मॉडल ग्रीन डिस्ट्रिक्ट’ बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 2 लाख बीजों का एक बड़ा हिस्सा भी पौधों में परिवर्तित होता है, तो जशपुर का पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) अत्यधिक सुदृढ़ हो जाएगा।
कल का दिन यह तय करेगा कि जशपुर की जनता अपने पर्यावरण के प्रति कितनी गंभीर है। उम्मीद की जा रही है कि यह पहल न केवल देश भर में एक नजीर बनेगी, बल्कि ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याओं से लड़ने में भी एक छोटी मगर प्रभावी भूमिका निभाएगी।
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