Simdega emerges as the new capital of Indian women's hockey; the selection of four players once again proves the 'Simdega Model'.

भारतीय महिला हॉकी की नई राजधानी बना सिमडेगा, चार खिलाड़ियों के चयन ने फिर साबित किया ‘सिमडेगा मॉडल’

Simdega emerges as the new capital of Indian women's hockey; the selection of four players once again proves the 'Simdega Model'.
Simdega emerges as the new capital of Indian women’s hockey; the selection of four players once again proves the ‘Simdega Model’.

नवीन कुमार 

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रांची/सिमडेगा: भारतीय महिला हॉकी टीम में झारखंड की चार खिलाड़ियों के चयन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि देश में महिला हॉकी की सबसे मजबूत प्रतिभा-भूमि अब सिमडेगा बन चुका है। चयनित चार खिलाड़ियों में निक्की प्रधान को छोड़ बाकी तीन खिलाड़ी सिमडेगा की हैं। यह केवल खिलाड़ियों के चयन की खबर नहीं, बल्कि उस खेल मॉडल की सफलता की कहानी है जिसने एक छोटे से जिले को भारतीय महिला हॉकी का सबसे बड़ा केंद्र बना दिया है।

पिछले कई वर्षों से भारतीय महिला हॉकी टीम में सिमडेगा की खिलाड़ियों की लगातार मौजूदगी रही है। कप्तान सलीमा टेटे से लेकर नई पीढ़ी की ब्यूटी डुंगडुंग जैसी खिलाड़ियों तक, सिमडेगा ने भारतीय हॉकी को लगातार नई प्रतिभाएं दी हैं। यही कारण है कि राष्ट्रीय टीम का हर नया अध्याय इस जिले के योगदान के बिना अधूरा दिखाई देता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सिमडेगा की सफलता केवल प्राकृतिक प्रतिभा का परिणाम नहीं है, बल्कि यहां विकसित हुई मजबूत खेल संस्कृति इसकी सबसे बड़ी वजह है। गांव-गांव में हॉकी जीवन का हिस्सा है। स्कूल स्तर पर नियमित प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं, स्थानीय टूर्नामेंट खिलाड़ियों को लगातार प्रतिस्पर्धा का अवसर देते हैं और खेल छात्रावास प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। सफल खिलाड़ी अगली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनते हैं, जिससे प्रतिभाओं का सिलसिला लगातार आगे बढ़ता रहता है।

जिले में उपलब्ध खेल अवसंरचना भी इस सफलता की महत्वपूर्ण कड़ी है। दो एस्ट्रोटर्फ मैदान, बेहतर प्रशिक्षण व्यवस्था और खेलों के प्रति प्रशासनिक प्रतिबद्धता ने सिमडेगा को देश के सबसे सफल हॉकी केंद्रों में शामिल कर दिया है। यहां प्रतिभा और संसाधनों का संतुलित विकास देखने को मिलता है।

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खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सिमडेगा मॉडल को झारखंड के गुमला, खूंटी, पश्चिमी सिंहभूम सहित देश के अन्य आदिवासी इलाकों में प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, तो भारतीय महिला हॉकी को आने वाले वर्षों में और अधिक प्रतिभाशाली खिलाड़ी मिल सकते हैं।

राजनीति में अक्सर कहा जाता है कि दिल्ली का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है। उसी तर्ज पर अब यह कहना गलत नहीं होगा कि भारतीय महिला हॉकी का रास्ता सिमडेगा से होकर गुजरता है। झारखंड के इस छोटे से जिले ने यह साबित कर दिया है कि सही नीति, मजबूत खेल संस्कृति, प्रशिक्षित कोच, बेहतर बुनियादी ढांचा और निरंतर निवेश मिलकर किसी भी क्षेत्र को राष्ट्रीय पहचान दिला सकते हैं।

सिमडेगा ने भारतीय हॉकी के लिए एक सफल मॉडल प्रस्तुत कर दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि देश के अन्य राज्य और जिले इस मॉडल को अपनाकर खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में कब ठोस कदम उठाते हैं।

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