PVTG विकास पर राष्ट्रीय मंथन: रांची घोषणा-2026 जारी, 7 राज्यों के 80 से अधिक संगठनों ने लिया साझा कार्रवाई का संकल्प

रांची: राजधानी रांची के होटल चाणक्य BNR में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन “Beyond Vulnerability: PVTG Development – Rights, Resilience and Pathways to Sustainable Graduation” मंगलवार को संपन्न हो गया। सम्मेलन में 7 राज्यों से आए 150 से अधिक प्रतिनिधियों और 80 से अधिक संस्थाओं, सरकारी विभागों, दानदाता संगठनों एवं विकास विशेषज्ञों ने भाग लिया।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सर्व सेवा समिति (4S-India) द्वारा टाटा ट्रस्ट, पॉल हैमलिन फाउंडेशन (PHF), कॉमन ग्राउंड एवं फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी (FES) के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में पहली बार देशभर के हितधारकों ने PVTG (विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह) समुदायों के अधिकार, आजीविका, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और सतत विकास पर व्यापक चर्चा की।
सम्मेलन की शुरुआत 27 जुलाई को पाकुड़ जिले की पहाड़िया समुदाय की महिलाओं द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक लोकगीत और लोकनृत्य से हुई। इस दौरान PVTG समुदायों की सांस्कृतिक विरासत और प्रकृति से जुड़ी जीवनशैली को प्रस्तुत किया गया।
सम्मेलन में 4S-India, Tata Trusts, Paul Hamlyn Foundation, Axis Bank Foundation, BRAC International, Bandhan Konnagar, Tribal Welfare Department, Rural Development Department, JSLPS, JTDS, J-PAL, Trickle Up, Jeevika समेत कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भागीदारी की। इसके अलावा पहाड़िया समुदाय के प्रतिनिधि, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं, पंचायत प्रतिनिधि, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और शोधकर्ता भी मौजूद रहे।
4S-India के कार्यकारी निदेशक मिहिर सहाना ने कहा कि PVTG समुदायों के विकास के लिए अब कल्याण आधारित दृष्टिकोण से आगे बढ़कर अधिकार आधारित और समुदाय नेतृत्व वाली रणनीति अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि PVTG विकास को परियोजना आधारित गतिविधि नहीं, बल्कि दीर्घकालिक राष्ट्रीय मिशन के रूप में देखा जाना चाहिए।
सम्मेलन के विभिन्न तकनीकी सत्रों और पैनल चर्चाओं में प्रतिभागियों ने स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच, कुपोषण, घटती जनसंख्या, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुरक्षित आजीविका, भूमि एवं वन अधिकार, सामाजिक बहिष्करण और सरकारी योजनाओं तक पहुंच जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। विशेषज्ञों ने स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक ज्ञान और प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित आजीविका मॉडल विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सम्मेलन की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि “रांची घोषणा – Beyond Vulnerability, 2026” का सामूहिक अंगीकरण रहा। इस घोषणा-पत्र पर सभी प्रमुख संस्थाओं और प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर कर PVTG समुदायों के समग्र विकास, नीति वकालत, ज्ञान साझेदारी और दीर्घकालिक सहयोग के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।

समापन अवसर पर PVTG समुदायों के बीच वर्षों से कार्य कर रहे समाजसेवियों और संस्थाओं को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। आयोजकों ने बताया कि सम्मेलन में प्राप्त सुझावों और अनुशंसाओं के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी तथा PVTG विकास के लिए निरंतर संवाद और संयुक्त कार्रवाई सुनिश्चित करने हेतु समन्वय तंत्र विकसित किया जाएगा।
आयोजकों के अनुसार, यह सम्मेलन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि PVTG समुदायों के अधिकार, सम्मान और समग्र विकास के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत है। सम्मेलन ने यह संदेश दिया कि सरकार, नागरिक समाज, दानदाता संस्थाएं और स्वयं समुदाय मिलकर कार्य करें तो PVTG समुदायों के जीवन में स्थायी और सम्मानजनक बदलाव संभव है।

















