एक जैसी पटकथा, एक जैसा अंत… झारखंड के दो गैंगस्टरों की कहानी का आखिरी अध्याय

डेस्क : झारखंड के अपराध जगत में कई गैंगस्टर आए और गए, लेकिन अमन साहू और सुजीत सिन्हा की कहानी अलग रही। दोनों कभी अपराध की दुनिया के मजबूत चेहरे थे। दोनों के नाम से कारोबारियों, ठेकेदारों और पुलिस महकमे में खौफ था। दोनों ने जेल की सलाखों के पीछे रहते हुए भी अपना नेटवर्क जिंदा रखा। और सबसे बड़ी बात, दोनों की कहानी का अंत भी लगभग एक जैसी पटकथा के साथ हुआ।

पहले अमन साहू। उसे रायपुर जेल से रांची लाया जा रहा था। पुलिस का दावा था कि रास्ते में उसने भागने की कोशिश की और पुलिसकर्मी का हथियार छीनने का प्रयास किया। जवाबी कार्रवाई हुई और पलामू में उसका अंत हो गया।
कुछ महीने बाद वही दृश्य फिर दोहराया गया। इस बार नाम था सुजीत सिन्हा का। साहिबगंज जेल से धनबाद शिफ्टिंग के दौरान उसने भी कथित तौर पर शौच का बहाना बनाकर भागने और पुलिसकर्मी का हथियार छीनने की कोशिश की। जामताड़ा में हुई मुठभेड़ में उसकी भी मौत हो गई।

दोनों घटनाओं में पुलिस का आधिकारिक पक्ष लगभग एक जैसा रहा—कैदी को दूसरी जेल ले जाया जा रहा था, रास्ते में भागने की कोशिश हुई, हथियार छीनने का प्रयास हुआ और आत्मरक्षा में पुलिस को गोली चलानी पड़ी। यह समानता इन दोनों मामलों को लंबे समय तक चर्चा का विषय बनाए रखेगी।

विडंबना यह भी है कि जिन दो नामों ने वर्षों तक झारखंड के अपराध जगत पर अपनी छाप छोड़ी, वे कभी एक-दूसरे के साथी थे। बाद में वर्चस्व की लड़ाई ने उन्हें कट्टर दुश्मन बना दिया। रंगदारी, वर्चस्व और गैंगवार ने दोनों गिरोहों को आमने-सामने ला दिया। एक समय ऐसा था जब उनके बीच की दुश्मनी झारखंड के सबसे खूनी गैंग संघर्षों में गिनी जाती थी।
अपराध की दुनिया में दोनों ने अपना-अपना साम्राज्य खड़ा किया। जेल में रहते हुए भी उन पर रंगदारी वसूलने, गिरोह चलाने और कारोबारियों को धमकाने के आरोप लगते रहे। पुलिस के लिए दोनों लंबे समय तक चुनौती बने रहे।
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अब दोनों नहीं हैं। कभी जिनके नाम से लोग सहम जाते थे, आज वे सिर्फ पुलिस फाइलों, अदालतों के रिकॉर्ड और झारखंड के अपराध इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं।
अमन साहू और सुजीत सिन्हा की कहानी यह भी बताती है कि अपराध की दुनिया में भले रास्ते अलग हों, लेकिन अंजाम अक्सर एक जैसा होता है। दोनों की दुश्मनी वर्षों तक सुर्खियों में रही, लेकिन आखिरकार उनकी कहानी का “फाइनल चैप्टर” भी एक जैसी पटकथा के साथ खत्म हुआ।















