केलाघाट की वादियां… जहां प्रकृति बार-बार बुलाती है, भागदौड़ और जिंदगी का तनाव मानो पीछे छूट जाता है

शंभू कुमार सिंह
सिमडेगा का केलाघाट इन दिनों प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। पहाड़ियों से उतरती ठंडी हवाएं, जलराशि में झलकता आसमान, हरियाली से ढकी ढलानें और बादलों की अठखेलियां यहां आने वाले पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। यहां पहुंचकर कुछ देर के लिए शहर की भागदौड़ और जिंदगी का तनाव मानो पीछे छूट जाता है।

केलाघाट की प्राकृतिक खूबसूरती मौसम के साथ और निखर उठती है। कभी पहाड़ियों को छूते बादल तो कभी पानी की सतह पर पड़ती सूरज की सुनहरी किरणें यहां का दृश्य बेहद मनमोहक बना देती हैं। यही वजह है कि कई पर्यटक इसकी तुलना शिमला, कश्मीर, ऊटी और कोडाइकनाल जैसी प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों की वादियों से करते हैं। खास बात यह है कि यह प्राकृतिक सौंदर्य सिमडेगा में ही सहज रूप से देखने को मिलता है।

केलाघाट की शांत और हरी-भरी वादियां लोगों को बार-बार अपनी ओर आकर्षित करती हैं। तनाव और रोजमर्रा की भागदौड़ से दूर कुछ समय बिताने के लिए लोग यहां पहुंचते हैं। प्रकृति की गोद में बैठकर शांत वातावरण का आनंद लेना पर्यटकों को मानसिक सुकून देता है।


केलाघाट का दिल के आकार वाला सेल्फी प्वाइंट भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। कुछ समय पहले असामाजिक तत्वों ने इसे क्षतिग्रस्त कर दिया था, जिससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों में निराशा थी। मामले को दृष्टि नाउ द्वारा जिला प्रशासन तक पहुंचाया गया। इसके बाद उपायुक्त कंचन सिंह की पहल पर सेल्फी प्वाइंट का पुनर्निर्माण कराया गया। अब यह स्थान एक बार फिर बच्चों, युवाओं और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है।

केलाघाट की प्राकृतिक छटा के बीच स्थित प्राचीन सिद्धेश्वरनाथ मंदिर इस पर्यटन स्थल की धार्मिक पहचान भी है। पहाड़ियों और जलराशि के बीच स्थित मंदिर का शांत वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है। मंदिर परिसर के घाट और आसपास फैली हरियाली इसकी खूबसूरती को और बढ़ा देती है।

केलाघाट में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार किया जाए और नौकायन जैसी गतिविधियों को दोबारा शुरू किया जाए, तो यह स्थल झारखंड के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में अपनी अलग पहचान बना सकता है। सुनियोजित विकास, बेहतर पहुंच मार्ग, पर्यटकों के लिए मूलभूत सुविधाएं और प्राकृतिक सौंदर्य का संरक्षण यहां पर्यटन की संभावनाओं को और बढ़ा सकता है।

केलाघाट केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि प्रकृति, आस्था और सुकून का अनूठा संगम है। यहां आने वाला हर पर्यटक खूबसूरत यादों के साथ लौटता है और प्रकृति की इन वादियों में दोबारा आने की इच्छा अपने साथ जरूर ले जाता है।

















