E-way bills continued to be generated even after GST registration cancellation.

GST में बड़ी गड़बड़ी: रजिस्ट्रेशन रद्द होने के बाद भी बनते रहे ई-वे बिल,  शून्य GST रिटर्न दाखिल करने वालों ने भी बनाए ई-वे बिल

E-way bills continued to be generated even after GST registration cancellation.

GST ऑडिट रिपोर्ट में सामने आई कई खामियां

नवीन कुमार 

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

रांची। झारखंड में सामान एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए बनाए जाने वाले ई-वे बिल की व्यवस्था में कई गड़बड़ियां सामने आई हैं। राज्य राजस्व लेखापरीक्षा की रिपोर्ट में ऐसे मामले मिले हैं, जहां GST से जुड़ी जानकारी और ई-वे बिल के आंकड़े आपस में मेल नहीं खाते।
सरल भाषा में समझें तो ई-वे बिल वह ऑनलाइन दस्तावेज है, जो सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के दौरान बनाया जाता है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कौन कितना सामान भेज रहा है और उस पर कितना टैक्स बनता है।

Deoghar
Advertisement

रजिस्ट्रेशन रद्द, फिर भी 84 ई-वे बिल

ऑडिट में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि दो कारोबारियों का GST रजिस्ट्रेशन रद्द हो चुका था, लेकिन इसके बाद भी उनके नाम से 84 ई-वे बिल बनाए गए।
इन मामलों में ब्याज और जुर्माने समेत करीब 15.41 लाख रुपये की टैक्स देनदारी सामने आई।
यानी जिस कारोबारी का GST नंबर रद्द हो चुका था, उसके नाम से भी सामान भेजने के लिए ई-वे बिल बनते रहे।

टैक्स रिटर्न में कारोबार शून्य, लेकिन ई-वे बिल बनते रहे

ऑडिट में दो ऐसे कारोबारी भी मिले, जिन्होंने GST में शून्य कारोबार की रिटर्न दाखिल की थी। लेकिन दूसरी तरफ उनके नाम से 15 ई-वे बिल बनाए गए।
इन मामलों में ब्याज और जुर्माने सहित करीब 64.53 लाख रुपये की टैक्स देनदारी सामने आई। इससे साफ है कि GST रिटर्न और ई-वे बिल की जानकारी में तालमेल की कमी थी।

Kashmir vastaralay
Advertisment

बिना GST रजिस्ट्रेशन वालों ने भी बनाए ई-वे बिल

ऑडिट में ऐसे लोगों की भी पहचान हुई, जिनका GST रजिस्ट्रेशन नहीं था, लेकिन उन्होंने सामान की आवाजाही के लिए ई-वे बिल बनाए।
ऐसे 21 ई-वे बिल मिले, जिनका कुल मूल्य 40 लाख रुपये से अधिक था। मामले की जानकारी विभाग को जांच और कार्रवाई के लिए दी गई।

एक बिल से कई ई-वे बिल बनाने की भी समस्या

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सिस्टम में ऐसी पुख्ता व्यवस्था नहीं थी, जिससे एक ही बिल का इस्तेमाल करके कई ई-वे बिल बनाए जाने पर तुरंत रोक लग सके।
ऑडिट ने इस व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत बताई है।
343.58 करोड़  रुपये की टैक्स देनदारी से जुड़ी विसंगतियां
ऑडिट में GSTN और ई-वे बिल सिस्टम के बीच तालमेल की कमी भी सामने आई। इसके कारण कई मामलों में ई-वे बिल में दिखाई गई जानकारी GST रिटर्न में सही तरीके से नहीं पहुंची।
रिपोर्ट में GSTR-1 और GSTR-3B से जुड़ी विसंगतियों में करीब  343.58 करोड़ रुपये की कर देनदारी का उल्लेख किया गया है।

RKDF
ADV

अधिकारियों को सिस्टम सुधारने की सलाह

राज्य राजस्व लेखापरीक्षा ने विभाग को सुझाव दिया है कि GST और ई-वे बिल सिस्टम को आपस में बेहतर तरीके से जोड़ा जाए।
साथ ही—
GST नंबर रद्द होने के बाद ई-वे बिल बनना रोका जाए।
एक ही बिल से कई ई-वे बिल बनने पर सिस्टम अलर्ट दे।
शून्य GST रिटर्न और ई-वे बिल के बीच अंतर की जांच हो।
बकाया टैक्स की जानकारी सिस्टम से आसानी से मिल सके।
जिन मामलों में GST रिटर्न और ई-वे बिल का आंकड़ा नहीं मिलता, उनकी जांच प्राथमिकता से की जाए।

नई और ताज़ा खबरों के लिए जुड़े रहें — Drishti Now