जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा रद्द करने की प्रक्रिया पर चंपई सोरेन ने उठाए सवाल

रांची: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता चंपई सोरेन ने जेपीएससी और जेएसएससी सीजीएल परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के बाद परीक्षाएं रद्द करने के हेमंत सरकार के फैसले और उसकी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। शनिवार को रांची में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने कहा कि परीक्षा रद्द करने से पहले निर्धारित नियमों का पालन किया जाना चाहिए था।

चंपई सोरेन ने कहा कि किसी परीक्षा में अनियमितता की शिकायत मिलने पर सबसे पहले जेपीएससी स्तर पर जांच होनी चाहिए थी। इसके बाद जांच रिपोर्ट विभागीय मंत्री को सौंपी जाती और फिर कैबिनेट को अंतिम निर्णय लेना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया।

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले जेपीएससी अध्यक्ष को पद से हटाया और जेल भेजा तथा सदस्यों से इस्तीफा लिया। इसके बाद कैबिनेट में परीक्षा रद्द करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने इसे नियम-कानून को दरकिनार करने वाला कदम बताया। चंपई सोरेन ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन और पुतला दहन कर रहे छात्रों पर पुलिस और झामुमो कार्यकर्ताओं द्वारा लाठीचार्ज किया गया। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद छात्रों ने संयम बनाए रखा।
उन्होंने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार छात्र विरोधी, युवा विरोधी और जनविरोधी हो गई है तथा तानाशाही की ओर बढ़ रही है। चंपई सोरेन ने आरोप लगाया कि गठबंधन सरकार के करीब सात वर्षों के कार्यकाल में एक भी नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से नहीं हुई।

भाजपा नेता ने कहा कि परीक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र केवल सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि राज्य सरकार तथ्यों को सामने लाने के बजाय उन्हें छिपाने के लिए अलग-अलग हथकंडे अपना रही है। चंपई सोरेन ने कहा कि छात्रों की मांगों को गंभीरता से सुनने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की जरूरत है। उन्होंने सरकार से छात्रों के हित में पारदर्शी तरीके से कार्रवाई करने की मांग की।

















