एमएमडीआर संशोधन विधेयक के विरोध में कांग्रेस का उलगुलान, 27 अगस्त से चरणबद्ध आंदोलन

रांची: संसद से पारित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक यानी एमएमडीआर बिल के खिलाफ झारखंड में विरोध तेज होने लगा है। झारखंड मुक्ति मोर्चा जहां 31 अगस्त से बिल के विरोध में जनजागरण अभियान शुरू करने जा रहा है, वहीं उसकी सहयोगी कांग्रेस ने भी केंद्र सरकार के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है।
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रांची में पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुबोधकांत सहाय ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एमएमडीआर कानून में संशोधन से आदिवासियों के अधिकारों के प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि झारखंड के खनिज संसाधनों और राज्य के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार को जवाब देना चाहिए।
सुबोधकांत सहाय ने झारखंड को मिलने वाले राजस्व और केंद्र के पास बकाया राशि का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सवाल किया कि वर्ष 2026-27 के बजट में सामाजिक और विकास से जुड़ी योजनाओं के लिए आवश्यक राशि की व्यवस्था किस तरह की जाएगी।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2024 के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि राज्यों के अधिकारों को लेकर न्यायालय का रुख स्पष्ट रहा है। इसके बावजूद केंद्र सरकार संसद में बहुमत के आधार पर राज्यों से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक पारित करा रही है।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि झारखंड देश की अर्थव्यवस्था में अपने करों और खनिज संसाधनों के माध्यम से महत्वपूर्ण योगदान देता है, लेकिन राज्य की बकाया राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है। उन्होंने इसे झारखंड पर आर्थिक हमला करार देते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।

एमएमडीआर संशोधन विधेयक और झारखंड के बकाये समेत अन्य मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की है। इसके तहत 27 अगस्त को जिला स्तर पर धरना-प्रदर्शन, 7 सितंबर को राजभवन घेराव और 9 से 15 सितंबर तक विभिन्न स्तरों पर विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
वहीं, झामुमो भी 31 अगस्त से एमएमडीआर बिल के खिलाफ जनजागरण अभियान शुरू करने की तैयारी में है। ऐसे में आने वाले दिनों में झारखंड में इस मुद्दे को लेकर सियासी टकराव और तेज होने के आसार हैं।
















