पश्चिमी सिंहभूम में 40 खदानें बंद, पलायन और लाल पानी पर कांग्रेस से सवाल; नेताओं ने कहा- सरकार प्रयासरत
चाईबासा: झारखंड के हक और हिसाब की लड़ाई को लेकर कांग्रेस के चरणबद्ध आंदोलन के तहत सोमवार को चाईबासा स्थित कांग्रेस भवन में प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने खनिज संसाधन, केंद्र-राज्य अधिकार, डीएमएफटी फंड और जल-जंगल-जमीन से जुड़े मुद्दे उठाए। वहीं पत्रकारों ने पश्चिमी सिंहभूम में बंद पड़ी लौह अयस्क खदानों, ग्रामीणों के पलायन, लाल पानी और खनन प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं को लेकर कांग्रेस नेताओं से सवाल किए।
पश्चिमी सिंहभूम में करीब 40 खदानें बंद होने पर सवाल
प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकारों ने सवाल उठाया कि पश्चिमी सिंहभूम जैसे खनिज संपदा वाले जिले में पिछले कई वर्षों से करीब 40 लौह अयस्क खदानें बंद हैं। खदानों के बंद होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर प्रभावित होने और ग्रामीणों के पलायन की समस्या का मुद्दा भी उठाया गया।
इस पर प्रदेश कांग्रेस द्वारा नामित प्रवक्ता देबू चटर्जी ने कहा कि सरकार इस दिशा में प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि इस मामले में स्थानीय उपायुक्त से अपेक्षित फीडबैक नहीं मिल रहा है।

डीएमएफटी फंड का स्थानीय लोगों को नहीं मिल रहा अपेक्षित लाभ
पत्रकारों ने District Mineral Foundation Trust (DMFT) फंड के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल किया। देबू चटर्जी ने कहा कि प्रावधान के अनुसार खनन प्रभावित क्षेत्रों और स्थानीय लोगों को इसका लाभ मिलना चाहिए, लेकिन लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है।
उन्होंने क्षेत्र में पेयजल की समस्या का भी उल्लेख किया और कहा कि कई इलाकों में लोग आज भी लाल पानी पीने को मजबूर हैं।

लाल पानी और मलेरिया का मुद्दा भी उठा
प्रेस वार्ता में पश्चिमी सिंहभूम के खनन प्रभावित इलाकों में पेयजल की स्थिति और मलेरिया की समस्या पर भी सवाल उठे। देबू चटर्जी ने कहा कि क्षेत्र मलेरिया प्रभावित है। जब उनसे मलेरिया से होने वाली मौतों के संबंध में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि इस विषय में सिविल सर्जन से बात की जाएगी।

खदानें बंद होने से पलायन का सवाल
पत्रकारों ने कांग्रेस नेताओं से पूछा कि अगर खनिज संपदा वाले जिले में बड़ी संख्या में खदानें बंद हैं और स्थानीय लोगों के सामने रोजगार का संकट है, तो पलायन रोकने के लिए सरकार और कांग्रेस की क्या भूमिका है।
इस पर कांग्रेस नेताओं ने कहा कि खदानों को दोबारा शुरू कराने और खनन प्रभावित ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान की दिशा में सरकार प्रयास कर रही है।
केंद्र की योजनाओं को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल
देबू चटर्जी ने केंद्र और राज्य सरकार से जुड़े कई मुद्दे भी उठाए। उन्होंने कहा कि जल-नल योजना के लिए केंद्र से मिलने वाला पैसा रोका गया है और मनरेगा का अतिरिक्त बोझ राज्य सरकार पर डाला गया है।
हालांकि, इन दावों पर केंद्र सरकार का पक्ष प्रेस वार्ता में उपलब्ध नहीं कराया गया।
खनिज संशोधन विधेयक 2026 पर कांग्रेस ने जताई चिंता
प्रेस वार्ता में देबू चटर्जी ने खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने झारखंड के खनिज संसाधनों, राजस्व और केंद्र-राज्य अधिकारों को लेकर सवाल खड़े किए।
वहीं सैमसन सुंडी ने कहा कि जल, जंगल और जमीन से जुड़े फैसलों का सीधा असर स्थानीय लोगों की आजीविका और पर्यावरण पर पड़ता है।
26 सितंबर को रांची में लोक भवन कूच
कांग्रेस नेताओं ने बताया कि आंदोलन के अगले चरण में 26 सितंबर को रांची में लोक भवन कूच किया जाएगा। मार्च शहीद स्थल, शहीद चौक के समीप कांग्रेस भवन से लोक भवन तक निकाला जाएगा। इसके बाद राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने की बात कही गई है।
इसके अलावा 5 से 10 अक्टूबर तक प्रखंड स्तर पर मार्च और प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।

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