रांची IIIT के छात्र की मौत के बाद हॉस्टल में बवाल, प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप; डायरेक्टर के इस्तीफे की मांग
रांची: झारखंड की राजधानी रांची स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IIIT) के एक छात्र की हॉस्टल के कमरे में मौत के बाद छात्रों का आक्रोश भड़क उठा है। खेलगांव थाना क्षेत्र के खेलगांव कॉम्प्लेक्स स्थित हॉस्टल में हुई इस घटना के बाद छात्र आंदोलन पर बैठ गए हैं। छात्र हॉस्टल की व्यवस्थाओं और संस्थान के प्रबंधन की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने संस्थान के डायरेक्टर को मौके पर बुलाने और उनके इस्तीफे की मांग की है।

हॉस्टल के कमरे में मिला फर्स्ट ईयर का छात्र
मिली जानकारी के अनुसार, IIIT के प्रथम वर्ष के छात्र आदित्य की देर रात हॉस्टल के कमरे में आत्महत्या की घटना सामने आई। घटना के बाद उसे आनन-फानन में अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना की खबर फैलते ही हॉस्टल में रह रहे छात्र आक्रोशित हो गए और संस्थान की व्यवस्थाओं को लेकर विरोध शुरू कर दिया।

मेडिकल सुविधा नहीं होने पर उठे सवाल
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि हॉस्टल परिसर में आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। छात्रों का कहना है कि वहां ऑक्सीजन और जीवनरक्षक सहायता से जुड़े जरूरी इंतजाम उपलब्ध नहीं थे।
छात्रों का दावा है कि जब आदित्य को फंदे से नीचे उतारा गया, तब उसमें कुछ हलचल थी। उनका आरोप है कि उस समय तत्काल और प्रभावी मेडिकल सहायता उपलब्ध कराई जाती, तो छात्र की जान बचाने की संभावना हो सकती थी।

प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप, रात से जारी प्रदर्शन
छात्रों ने हॉस्टल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए जरूरी व्यवस्था होनी चाहिए थी। उनका कहना है कि इस घटना ने हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना के बाद से छात्र हॉस्टल परिसर में धरने पर बैठे हैं। छात्रों और प्रबंधन के बीच कई दौर की बातचीत होने के बावजूद, खबर तैयार किए जाने तक कोई समाधान नहीं निकल पाया था।

डायरेक्टर को बुलाने और इस्तीफे की मांग
प्रदर्शनकारी छात्र संस्थान के डायरेक्टर को मौके पर बुलाने और उनकी जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। छात्रों ने डायरेक्टर के इस्तीफे की भी मांग उठाई है। उनका कहना है कि संस्थान प्रबंधन को हॉस्टल में आपातकालीन चिकित्सा सुविधा, विद्यार्थियों की सुरक्षा और संकट के समय त्वरित सहायता सुनिश्चित करने के लिए जवाब देना चाहिए।
जांच और जवाबदेही पर टिकी नजरें
छात्र की मौत के बाद अब घटना की परिस्थितियों, मेडिकल सहायता मिलने में लगे समय और हॉस्टल की आपातकालीन व्यवस्थाओं की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि घटना के समय संस्थान की ओर से क्या कदम उठाए गए और उपलब्ध चिकित्सा सहायता कितनी प्रभावी थी।फिलहाल छात्रों का विरोध संस्थान की व्यवस्था और प्रबंधन की जवाबदेही को लेकर केंद्रित है। मामले में पुलिस और संस्थान प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही घटना से जुड़े सभी पहलुओं की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
ड्रिस्टी नाउ की नजर इस मामले पर बनी हुई है।


















