अमेरिका के म्यूजियम भारत को लौटाएगा तीन पुरानी कांस्य मूर्तियां ,जाने कैसे हुआ वापसी की प्रक्रिया

अमेरिका के म्यूजियम भारत को लौटाएगा तीन पुरानी कांस्य मूर्तियां ,जाने कैसे हुआ वापसी की प्रक्रिया

अमेरिका के म्यूजियम भारत को लौटाएगा तीन पुरानी कांस्य मूर्तियां ,जाने कैसे हुआ वापसी की प्रक्रिया

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अमेरिका के म्यूजियम भारत को लौटाएगा तीन पुरानी कांस्य मूर्तियां ,जाने कैसे हुआ वापसी की प्रक्रिया

डेस्क, 30 जनवरी : अमेरिका के स्मिथसोनियन नेशनल म्यूजियम ऑफ एशियन आर्ट ने भारत की पुरानी धरोहर वापस करने का बड़ा फैसला लिया है। म्यूजियम ने तीन पुरानी कांस्य (ब्रॉन्ज) की मूर्तियां भारत सरकार को लौटाने की घोषणा की है। ये मूर्तियां तमिलनाडु के मंदिरों से चोरी होकर निकाली गई थीं।

ये फैसला 28 जनवरी 2026 को लिया गया। म्यूजियम ने बहुत जांच-पड़ताल की और पाया कि ये मूर्तियां गलत तरीके से मंदिरों से हटाई गई थीं। इसलिए इन्हें वापस करना सही समझा।कौन-कौन सी मूर्तियां वापस हो रही हैं?

शिव नटराज: यह बहुत खूबसूरत मूर्ति है जिसमें भगवान शिव नाचते हुए दिखते हैं। यह चोल काल की है (लगभग 990 ईस्वी)। यह तंजावुर जिले के एक मंदिर से है। भारत सरकार ने कहा है कि यह मूर्ति कुछ समय के लिए म्यूजियम में ही रहेगी (लोन पर), ताकि लोग इसकी पूरी कहानी देख सकें – कहां से आई, कैसे चोरी हुई और अब वापस कैसे जा रही है।

सोमास्कंद: यह मूर्ति भगवान शिव, माता पार्वती और उनके बेटे कार्तिकेय को साथ में दिखाती है। यह 12वीं शताब्दी की चोल काल की है। यह मन्नारकुडी तालुक के एक मंदिर से है।
सेंट सुंदरर विद परवई: यह 16वीं शताब्दी की विजयनगर काल की मूर्ति है। इसमें नयनार संत सुंदरर और उनकी पत्नी परवई दिखाए गए हैं। यह कल्लाकुरिची तालुक के एक मंदिर से है।

ये तीनों मूर्तियां दक्षिण भारत की पुरानी कला की शानदार मिसाल हैं। ये मंदिरों में पूजा के लिए और जुलूस में इस्तेमाल होती थीं।म्यूजियम ने पुराने फोटो (1956-1959 के) देखकर पुष्टि की कि ये मूर्तियां पहले मंदिरों में थीं। यह काम फ्रेंच इंस्टीट्यूट ऑफ पॉन्डिचेरी के साथ मिलकर किया गया।यह फैसला भारत की खोई हुई धरोहर वापस लाने की बड़ी कोशिश का हिस्सा है। बहुत से लोग इसे ऐतिहासिक कदम मान रहे हैं।

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