Babulal Marandi attacks health department over scams, demands CBI probe

स्वास्थ्य विभाग में घोटालों को लेकर बाबूलाल मरांडी का हमला, सीबीआई जांच की मांग

Babulal Marandi attacks health department over scams, demands CBI probe
Babulal Marandi attacks health department over scams, demands CBI probe

रांची : झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Babulal Marandi ने राज्य के स्वास्थ्य विभाग में कथित भ्रष्टाचार, दवा बर्बादी, एंबुलेंस खरीद अनियमितता और नियमों के विपरीत नियुक्तियों को लेकर हेमंत सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

प्रेस वार्ता में मरांडी ने कहा कि राज्य में भ्रष्टाचार को “शिष्टाचार” की तरह स्वीकार कर लिया गया है और सरकार काम करने के बजाय “कमाने” में लगी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत गठित JMHIDPCL (झारखंड मेडिकल एंड हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एंड प्रोक्योरमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड) को टेंडर और कमीशनखोरी का अड्डा बना दिया गया है।

कंसलटेंट नियुक्ति पर सवाल

मरांडी ने आरोप लगाया कि JMHIDPCL में शैलेन्द्र श्रीवास्तव को कंसलटेंट के रूप में सेवा विस्तार देने में नियमों की अनदेखी की गई। उन्होंने कहा कि 2016 के नियम के अनुसार किसी सेवानिवृत्त अधिकारी को अधिकतम तीन वर्ष तक ही सेवा विस्तार दिया जा सकता है, जबकि 2022 के नियमों में तीन वर्ष से अधिक विस्तार के लिए मुख्यमंत्री की स्वीकृति अनिवार्य की गई थी।

उनका दावा है कि इन नियमों के बावजूद 12 दिसंबर 2025 को बिना मुख्यमंत्री की अनुमति के शैलेन्द्र श्रीवास्तव को चौथे वर्ष के लिए नियुक्त किया गया और वर्तमान में वे पांचवें वर्ष में भी पद पर बने हुए हैं।

एंबुलेंस खरीद और दवा बर्बादी का आरोप

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जून 2022 में 55.58 करोड़ रुपये की लागत से खरीदी गई 206 एंबुलेंसों का उपयोगिता मूल्यांकन नहीं किया गया और वे एक वर्ष तक नामकुम में निष्क्रिय पड़ी रहीं। इसके बावजूद वर्ष 2026 में करीब 80 करोड़ रुपये की लागत से 237 नई कस्टमाइज्ड एंबुलेंस खरीदने की निविदा जारी कर दी गई।

उन्होंने कैग रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि एंबुलेंस खरीद, तकनीकी मूल्यांकन और संपत्ति प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। साथ ही कॉरपोरेशन के गोदामों में करोड़ों रुपये की जीवनरक्षक दवाएं एक्सपायर पाई गईं, जो मरीजों तक नहीं पहुंच सकीं।

ऑक्सीजन टैंक परियोजना में गड़बड़ी का आरोप

मरांडी ने कोविड काल की ऑक्सीजन टैंक परियोजना में भी लगभग 24 करोड़ रुपये की अनियमितता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आवश्यक अनुभव और सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं करने वाली कंपनियों को ठेका दिया गया।

उन्होंने दावा किया कि चयनित कंपनी MDD Medical Systems India Pvt Ltd के पास निर्धारित 10 वर्षों के बजाय केवल तीन वर्ष का अनुभव था, जबकि दूसरी कंपनी Sanatan Bus Body Building Pvt Ltd निर्धारित वार्षिक टर्नओवर की शर्त पूरी नहीं करती थी।

सरकार पर “आईवॉश” का आरोप

मरांडी ने कहा कि सरकार जांच के नाम पर केवल “आईवॉश” कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि नामकुम स्थित ऑडिट स्थल को “छावनी” में बदल दिया गया ताकि जानकारी बाहर न जा सके। उन्होंने JMHIDPCL का दोबारा ऑडिट कराने, ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करने और कैग रिपोर्ट में उजागर मामलों में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की।

स्वास्थ्य मंत्री और अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग

नेता प्रतिपक्ष ने स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य सचिव और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच सीबीआई से कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा की सरकार बनी तो सभी कथित गड़बड़ियों की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।

इस प्रेस वार्ता में भाजपा प्रदेश प्रवक्ता Pratul Shahdeo और प्रदेश मीडिया सह-प्रभारी Yogendra Pratap Singh भी मौजूद रहे।

नई और ताज़ा खबरों के लिए जुड़े रहें — Drishti Now