छात्रों पर हमले को बाबूलाल मरांडी ने बताया शर्मनाक, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

Babulal Marandi termed the attack on students shameful.

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रांची। झारखंड में छात्र आंदोलन के दौरान रांची, गिरिडीह और हजारीबाग में हुई झड़प और मारपीट को लेकर राजनीति तेज हो गई है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने छात्रों के साथ हुई कथित मारपीट को शर्मनाक बताते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा है।

बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि छात्र पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत लोकतांत्रिक तरीके से पुतला दहन करने जा रहे थे, लेकिन रांची, गिरिडीह और हजारीबाग में उन पर हमला किया गया। उन्होंने कहा कि पुलिस की मौजूदगी में छात्रों के साथ मारपीट होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

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उन्होंने आरोप लगाया कि हजारीबाग के गांधी मैदान और गिरिडीह में छात्रों पर मास्क पहने लोगों ने लाठी-डंडों से हमला किया, जबकि रांची में भी छात्रों के साथ मारपीट की गई। मरांडी ने इन घटनाओं के पीछे झामुमो कार्यकर्ताओं का हाथ होने का आरोप लगाया है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि छात्र अपने आंदोलन और न्याय की मांग को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठा रहे थे। सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलन को पहले कथित तौर पर धोखे और साजिश के जरिए खत्म करने का प्रयास किया गया और अब उनके खिलाफ बल प्रयोग किया जा रहा है।

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मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब छात्र संगठित होकर आंदोलन कर रहे थे, तब सरकार उनसे सीधे संवाद करने के बजाय अब कथित रूप से प्री-प्लानिंग के तहत छात्रों को निशाना बनवा रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार से मिले कथित छल के बाद छात्रों में नाराजगी स्वाभाविक है, लेकिन इसके बावजूद वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे थे। छात्रों के साथ जिस तरह की मारपीट हुई, वह निंदनीय है।

बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर माहौल खराब करने का आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं झारखंड के लिए अच्छा संकेत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि हिंसा और टकराव की राजनीति राज्य और झामुमो, दोनों के लिए नुकसानदेह होगी।

उन्होंने पुलिस-प्रशासन से छात्रों पर हमला करने वाले लोगों की पहचान कर तत्काल कार्रवाई और गिरफ्तारी की मांग की। मरांडी ने चेतावनी दी कि यदि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो सरकार और जिला प्रशासन को इसका राजनीतिक रूप से जवाब देना पड़ेगा।

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