Bharat Tiwari encounter case: Murder case registered against police personnel.

भरत तिवारी एनकाउंटर मामला, पुलिसकर्मी पर हत्या का मुकदमा दर्ज

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भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में क्यों पुलिस पर उठे थे सवाल और क्यों एसडीपीओ को होना पड़ा था लाइन हाजिर।

  • Bharat Tiwari encounter case: Murder case registered against police personnel.

आरा (भोजपुर): बिहार की अपराध की दुनिया में कुछ ऐसे मामले रहे हैं, जिन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े किए हैं। ऐसा ही एक बहुचर्चित मामला था ‘भरत तिवारी एनकाउंटर’। जिस मुठभेड़ को पुलिस ने अपनी बड़ी कामयाबी बताया था, वही बाद में कानूनी पचड़ों और विवादों में फंसकर रह गई है।

​क्या था मामला?

भोजपुर जिले में हुई इस घटना ने उस समय पूरे बिहार को हिलाकर रख दिया था। पुलिस का दावा था कि  अपराधी भरत तिवारी एक अपराधी था मुठभेड़ हुई और जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया। पुलिस ने इसे आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई बताया था।

​ग्रामीणों ने खोले थे राज

मुठभेड़ के बाद जब स्थानीय लोगों के बयान सामने आए, तो पुलिस की थ्योरी पूरी तरह से ढहती नजर आई। ग्रामीणों का आरोप था कि भरत तिवारी ने पुलिस के सामने हथियार डाल दिए थे। चश्मदीदों के मुताबिक, एसडीपीओ राजेश शर्मा ने उसे सुरक्षित रखने का भरोसा दिया था, लेकिन सरेंडर करने के कुछ ही देर बाद उसे गोलियों से छलनी कर दिया गया। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया था कि उसे बहुत करीब से गोलियां मारी गई थीं।

​एसडीपीओ पर गिरी थी गाज

इस मामले ने जब तूल पकड़ा, तो सरकार और पुलिस मुख्यालय को तुरंत एक्शन लेना पड़ा। विवादों के केंद्र में रहे तत्कालीन एसडीपीओ राजेश शर्मा को न केवल ‘लाइन हाजिर’ कर दिया गया, बल्कि उन पर हत्या की प्राथमिकी (FIR) भी दर्ज की गई थी।

​जांच का विषय

यह घटना इस बात का बड़ा उदाहरण बनी कि कैसे एक पुलिसिया कार्रवाई ‘सफलता’ से ‘विवाद’ में बदल सकती है। इस मामले ने एनकाउंटर के कानूनी पहलुओं और मानवाधिकारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए।

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