झारखंड: अवैध घुसपैठ BJP प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव का बड़ा हमला, हेमंत सरकार से ‘डिटेंशन सेंटर’ बनाने की मांग
रांची: झारखंड में अवैध घुसपैठ का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधते हुए सीमावर्ती जिलों में तत्काल ‘डिटेंशन सेंटर’ बनाने की मांग की है।
“झारखंड घुसपैठियों का ‘सेफ जोन’ बना”
प्रतुल शाह देव ने दावा किया कि पड़ोसी राज्यों, विशेषकर पश्चिम बंगाल में सख्त कार्रवाई के बाद अवैध घुसपैठिये अब झारखंड को अपना नया सुरक्षित ठिकाना बना रहे हैं। उन्होंने कहा, “झारखंड के सीमावर्ती जिले—पाकुड़, जामताड़ा, दुमका और साहिबगंज—लंबे समय से अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ की समस्या से जूझ रहे हैं। हेमंत सरकार की कथित तुष्टिकरण की नीतियों के कारण घुसपैठियों को यहां संरक्षण मिल रहा है, जिससे ये जिले उनके लिए ‘सेफ जोन’ बन गए हैं।”
जनसांख्यिकीय बदलाव पर जताई चिंता
भाजपा प्रवक्ता ने 1951 से 2011 के बीच की जनगणना के आंकड़ों का हवाला देते हुए संथाल परगना क्षेत्र में जनसांख्यिकीय असंतुलन पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इन 60 वर्षों में क्षेत्र में आदिवासियों की जनसंख्या में 16% की गिरावट आई है, जबकि मुस्लिम आबादी में 14% की वृद्धि देखी गई है। उन्होंने इसे राज्य की सांस्कृतिक और सामाजिक संरचना के लिए एक बड़ा खतरा बताया।
केंद्र की कार्रवाई का समर्थन
प्रतुल शाह देव ने अवैध घुसपैठियों की पहचान के लिए पूर्व न्यायाधीश प्रकाश प्रभात नवेलकर के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय कमेटी के निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और देश के जनसांख्यिकीय संतुलन के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
हेमंत सरकार से की ये मांगें:
भाजपा प्रवक्ता ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से तत्काल प्रभाव से ये कदम उठाने की मांग की है:
1. डिटेंशन सेंटर: पाकुड़, जामताड़ा, दुमका और साहिबगंज जैसे सीमावर्ती जिलों में तुरंत डिटेंशन सेंटर स्थापित किए जाएं।
2. विशेष सत्यापन अभियान: ‘इंडियन फॉरेनर्स एक्ट’ के तहत जिला दंडाधिकारियों को निर्देश देकर संदिग्ध विदेशी नागरिकों की पहचान के लिए व्यापक अभियान चलाया जाए।
3. सख्त निगरानी: राज्य सरकार अपनी ढुलमुल नीति छोड़ घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करे।
प्रतुल शाह देव ने स्पष्ट किया कि यह केवल कानून-व्यवस्था का सवाल नहीं, बल्कि राज्य के स्थानीय संसाधनों, रोजगार और भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है। भाजपा इस मामले को लेकर आगे भी संघर्ष जारी रखेगी।

















