धान खरीद घोटाले की जांच CBI से क्यों नही कराई , हाई कोर्ट की मौखिक टिप्पणी

धान खरीद घोटाले की जांच CBI से क्यों नही कराई , हाई कोर्ट की मौखिक टिप्पणी

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  1. धान खरीद घोटाले की जांच की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई की. बहस के दौरान अदालत ने पूछा कि जब धान की खरीदारी वर्ष 2011, 2012 और वर्ष 2013 में हुई, तो दो साल बाद प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश क्यों दिया गया?
  अदालत ने मुख्य सचिव से इस मामले में जवाब मांगा है. प्रार्थियों के अधिवक्ता ऋषि पल्लव के मुताबिक, अदालत ने सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कहा कि पूरे राज्य में धान खरीद में लगभग एक हजार करोड़ से ज्यादा का घोटाला हुआ है, तो इसकी जांच का जिम्मा  CBI  को क्यों नहीं दिया गया.
 
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पूरा वाक्या गढ़वा और पलामू जिले से जुड़ा हुआ है. याचिका के मुताबिक इन जिलों में वर्ष 2011, 2012 और वर्ष 2013 में धान खरीदारी के लिए सरकार से लैंपस और पैक्स को राशि दी थी.अब अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 अप्रैल की तिथि निर्धारित की है.
 धान की खरीद के बाद बची राशि को नहीं लौटा गया. इस मामले में उमाशंकर सिंह समेत छह अन्य की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर इस पूरे मामले की जांच की मांग की गई है.
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