चतरा मौत के साये में पढ़ रहे नौनिहाल! सरकारी स्कूल का एक कमरा बना कबाड़खाना
161 बच्चों का नामांकन, पढ़ाई के लिए महज दो कमरे; शौचालय में ताला और स्कूल तक पहुंचने के लिए पगडंडी का सहारा। जिला शिक्षा अधीक्षक के निरीक्षण के बाद भी सुधार पर सवाल
चतरा में सरकारी शिक्षा व्यवस्था की बदहाली की एक तस्वीर सामने आई है, जो बच्चों की सुरक्षा और पढ़ाई के इंतजामों पर सवाल खड़े करती है। प्रतापपुर प्रखंड के चरकाकला गांव स्थित सरकारी उत्क्रमित मध्य विद्यालय में 161 बच्चों का नामांकन है, लेकिन पढ़ाई के लिए महज दो कमरे उपलब्ध हैं। इनमें से एक कमरा बेंच-डेस्क के कबाड़ से भरा पड़ा है। शौचालय पर ताला लटका है और विद्यालय तक पहुंचने के लिए बच्चों को पगडंडी का सहारा लेना पड़ता है। ऐसे में सवाल उठता है कि जर्जर भवन और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के बीच बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी? जिला शिक्षा अधीक्षक के औचक निरीक्षण के बाद भी समस्याओं के समाधान को लेकर सवाल बने हुए हैं।
जर्जर भवन में पढ़ाई, 161 बच्चों के लिए सिर्फ दो कमरे
चतरा जिले के प्रतापपुर प्रखंड की डुमरवार पंचायत के चरकाकला गांव स्थित सरकारी उत्क्रमित मध्य विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था की चुनौतियां साफ नजर आती हैं। कभी नक्सल प्रभावित रहे इस इलाके में आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव बच्चों की पढ़ाई को प्रभावित कर सकता है। विद्यालय में 161 बच्चों का नामांकन है, लेकिन पढ़ाई के लिए महज दो कमरे हैं। इनमें से एक कमरे में पुराने बेंच-डेस्क और अन्य अनुपयोगी सामान भरे पड़े हैं। इससे उपलब्ध कमरों का इस्तेमाल किस तरह हो रहा है, यह भी जांच का विषय है। निरीक्षण के दिन विद्यालय में 60 बच्चे उपस्थित थे। मौके पर कई बच्चे स्कूल की पोशाक में भी नजर नहीं आए।
शौचालय पर ताला, स्कूल तक पहुंचने में परेशानी
विद्यालय की समस्याएं केवल कमरों तक सीमित नहीं हैं। शौचालय पर ताला लगा होने से बच्चों को स्वच्छता संबंधी सुविधाएं मिलने पर सवाल खड़े होते हैं। वहीं, स्कूल तक पहुंचने के लिए पगडंडी का सहारा लेना पड़ता है। ऐसे में बच्चों को सुरक्षित और सुविधाजनक आवागमन उपलब्ध कराना भी जरूरी है। विद्यालय में एक सरकारी शिक्षक और एक पारा शिक्षक के कार्यरत होने की जानकारी मिली है। बताया जाता है कि कार्यालयी कार्यों के कारण एक शिक्षक के बाहर रहने पर दूसरे शिक्षक पर पढ़ाई की जिम्मेदारी आ जाती है। ऐसे में बच्चों की संख्या, उपलब्ध कमरों और शिक्षकों की व्यवस्था के बीच बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
निरीक्षण के बाद क्या बदला? शिक्षा विभाग से सवाल
जिला शिक्षा अधीक्षक रामजी कुमार के औचक निरीक्षण के बाद अब यह जानना जरूरी है कि विद्यालय की समस्याओं को दूर करने के लिए क्या कार्रवाई की गई। क्या जर्जर भवन की सुरक्षा जांच कराई जाएगी? कबाड़ से भरे कमरे को खाली कराकर पढ़ाई के लिए उपयोग में लाया जाएगा? शौचालय को बच्चों के इस्तेमाल के योग्य बनाया जाएगा और विद्यालय तक पहुंचने के रास्ते की समस्या का समाधान होगा?इन सवालों के जवाब शिक्षा विभाग की कार्रवाई से ही मिल सकेंगे। निरीक्षण का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब समस्याओं की पहचान के साथ उनका समयबद्ध समाधान भी सुनिश्चित किया जाए।
बच्चों के भविष्य से जुड़ा है मामला
चरकाकला विद्यालय की स्थिति केवल एक स्कूल की समस्या नहीं, बल्कि बच्चों को सुरक्षित वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी से जुड़ा मामला है। 161 बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए भवन की स्थिति, कक्षाओं की उपलब्धता, शौचालय, रास्ते और शिक्षकों की व्यवस्था की समीक्षा जरूरी है।
अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इन समस्याओं को दूर करने के लिए क्या कदम उठाता है और बच्चों को कब तक बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल पाता है।

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