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विकसित भारत @2047 के संकल्प में झारखंड की भूमिका: नीति आयोग की बैठक में CM हेमंत सोरेन ने प्रस्तुत किया राज्य का रोडमैप

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नवींन कुमार

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नई दिल्ली: नीति आयोग की 11वीं शासी परिषद (Governing Council) की बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने राज्य के भविष्य के लिए एक व्यापक और महत्वाकांक्षी रूपरेखा प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री ने झारखंड को केवल एक ‘खनिज समृद्ध राज्य’ की पारंपरिक छवि से बाहर निकालकर, इसे देश के प्रमुख ‘मैन्युफैक्चरिंग हब’ और ‘नॉलेज इकोनॉमी’ के रूप में स्थापित करने का संकल्प दोहराया।

खनिज संपदा का मानव पूंजी से मिलन

मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों का वास्तविक लाभ तब तक नहीं मिल सकता, जब तक उन्हें राज्य की मानव पूंजी के साथ नहीं जोड़ा जाता। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अब केवल खनिज निकालने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि उन खनिजों का ‘वैल्यू एडिशन’ (Value Addition) झारखंड में ही हो, इसके लिए प्रतिबद्ध है। इससे राज्य में बड़े पैमाने पर औद्योगिक निवेश आएगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

भविष्योन्मुखी उद्योगों पर ध्यान

हेमन्त सोरेन ने झारखंड में निम्नलिखित क्षेत्रों को प्राथमिकता देने की वकालत की:
आधुनिक उद्योग: टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन-एनर्जी, और एग्रो-फूड प्रोसेसिंग।

एआई और सस्टेनेबिलिटी: खनन क्षेत्र में एआई-बेस्ड मिनरल एक्सप्लोरेशन और सस्टेनेबल माइनिंग प्रैक्टिसेज को बढ़ावा देना।
नॉलेज और इनोवेशन: राज्य में उच्चस्तरीय अनुसंधान और नवाचार केंद्र विकसित करना।

शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास: विकास के मुख्य स्तंभ
मुख्यमंत्री ने शिक्षा और स्वास्थ्य को विकास की धुरी बताते हुए कहा कि राज्य इन क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला रहा है:

शिक्षा: सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस की सफलता का उल्लेख करते हुए उन्होंने 5,000 उत्कृष्ट विद्यालयों के लक्ष्य पर जोर दिया। साथ ही, राज्य में एनसीईआरटी (NCERT) का क्षेत्रीय केंद्र स्थापित करने की मांग रखी।

कौशल विकास: सारथी योजना के माध्यम से युवाओं को एआई (AI), ईवी (EV), ड्रोन और सोलर टेक्नोलॉजी जैसे आधुनिक क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जा रहा है, ताकि वे वैश्विक जरूरतों के अनुरूप तैयार हो सकें।

स्वास्थ्य: पंचायत स्तर तक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार से सहयोग की अपेक्षा की।

प्रशासनिक सरलीकरण और केंद्र से प्रमुख मांगें

राज्य के विकास की गति को तेज करने के लिए मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के समक्ष महत्वपूर्ण मांगें रखीं:

1. वित्तीय अधिकार: कोयला कंपनियों पर बकाया 1.36 लाख करोड़ रुपये का भुगतान सुनिश्चित करना और जल जीवन मिशन के लिए शेष 6,000 करोड़ रुपये की राशि शीघ्र जारी करना।

2. नीतिगत सहयोग: डीएमएफटी (DMFT) मानकों में संशोधन और राज्य में औद्योगिक बुनियादी ढांचे के निर्माण हेतु भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को सरल बनाना।

3. खेल: झारखंड की खेल प्रतिभाओं को देखते हुए राज्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल महाकुंभों की मेजबानी का अवसर प्रदान करना।

डिजिटल गवर्नेंस की ओर कदम

बैठक में मुख्यमंत्री ने बताया कि झारखंड डिजिटल गवर्नेंस में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। राज्य सरकार ‘सीएम डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म’ और ‘इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर’ विकसित कर रही है, जिससे सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता आएगी और डेटा-आधारित निर्णय लेना सुलभ होगा।

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